ब्रिटेन पर ‘कर्मों का प्रहार’: मंदिर की जमीन मस्जिद को दी, अब अपने ही देश में उठी बगावत की चिंगारी!
ब्रिटेन इस वक्त एक ऐसे गहरे संकट के साये में है, जिसने पूरे यूरोप को झकझोर कर रख दिया है। इसे मुस्लिम तुष्टीकरण का ‘श्राप’ कहें या नीतिगत चूक, लेकिन ब्रिटेन ने उदारता के नाम पर हिंदुओं की आस्था को जो चोट पहुँचाई थी, उसका फल उसे मिलता दिख रहा है। जिस ब्रिटेन ने कभी भारत के टुकड़े कर पाकिस्तान बनवाया था, आज उसी की जमीन पर ‘पीओके’ जैसी बगावत की गूँज सुनाई दे रही है। हाल ही में ब्रिटेन ने एक 40 साल पुराने मंदिर की जमीन को मुस्लिम संस्था को बेच दिया, जिसके तुरंत बाद वहां ‘विद्रोह’ की बिजली गिरी है। अब ब्रिटेन का ही एक हिस्सा खुद को देश से अलग करने के लिए जनमत संग्रह की मांग कर रहा है। लोगों का कहना है कि वे उस ब्रिटेन का हिस्सा नहीं रहना चाहते जो तेजी से ‘इस्लामिक’ स्वरूप लेता जा रहा है।
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इतिहास खुद को दोहरा रहा है; जिस विभाजन की नींव ब्रिटेन ने भारत में रखी थी, आज वैसी ही स्थिति उसके अपने घर में पैदा हो गई है। दरअसल, लंदन से महज 120 किमी दूर पीटरबरो में स्थित ‘न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स’ में पिछले चार दशकों से ‘भारत हिंदू समाज’ का मंदिर और कम्युनिटी सेंटर सुचारू रूप से चल रहा था। इस बेशकीमती जमीन का मालिकाना हक पीटरबरो सिटी काउंसिल के पास था, जो वर्तमान में भारी बजट घाटे से जूझ रही है। इस आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए काउंसिल ने उस परिसर की नीलामी कर दी जहाँ 40 साल से हिंदू पूजा-पाठ कर रहे थे। हालांकि ब्रिटेन के हिंदू समाज ने भी इस नीलामी में हिस्सा लिया, लेकिन आरोप है कि काउंसिल ने बोलियों के मूल्यांकन में जानबूझकर लापरवाही की और पक्षपात करते हुए यह जमीन ‘यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन’ को सौंप दी।
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इस फैसले के बाद ब्रिटेन को तुष्टीकरण का ‘करंट’ लगने में देर नहीं लगी। लंदन के पास स्थित ऑक्सफोर्डशायर के निवासियों ने अब ब्रिटेन से अलग होने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) का बिगुल फूंक दिया है। इस विद्रोह की मुख्य वजह सरकार द्वारा उनके इलाके में 3,750 मुस्लिम शरणार्थियों की बस्ती बसाने का फैसला है। ग्रामीणों का आक्रोश इस बात पर है कि सरकार ने स्थानीय लोगों की सहमति के बिना ही शरणार्थियों को वहां बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऑक्सफोर्डशायर के लोगों का सीधा सवाल है कि उनके अधिकारों का क्या होगा? अगर इन शरणार्थियों की वजह से इलाके की डेमोग्राफी बदलती है या दंगे भड़कते हैं, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? आज ब्रिटेन अपने ही फैसलों के जाल में उलझता नजर आ रहा है।
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