बंद सीमाओं पर कंगाली, सेना का पलायन, पाकिस्तान की ओर बढ़ते तालिबान के कदम

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रोक दिए रास्ते, खाना हो गया बंद, बॉर्डर छोड़ भाग रही सेना, पाकिस्तान पर ऐसे तो हो जाएगा तालिबान का राज

अफगानिस्तान का पलटवार: भारत से दोस्ती, पाकिस्तान को मिर्ची, और एक रणनीतिक प्रांत का उद्भव

जब से अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने भारत की धरती पर कदम रखा है, तब से पाकिस्तान की पेशानी पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच पनप रही दोस्ती की मिठास पाकिस्तान को कड़वी लग रही है। मानो, मुत्ताकी के दिल्ली पहुंचते ही पाकिस्तान ने काबुल पर वार करने की जल्दी कर दी। लेकिन, अब अफगानिस्तान वह पुराना मुल्क नहीं रहा जो पाकिस्तान के इशारों पर नाचता था। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए उसकी हदों को पहचानने पर मजबूर कर दिया है। हताश पाकिस्तान अब अपने ‘सहयोगी’ देशों के आगे मदद की भीख मांग रहा है। अफगानिस्तान के लड़ाकों ने तो पाकिस्तान के घर में घुसकर उसकी सेना को निशाना बनाया है, और कई पाकिस्तानी चौकियों पर अपना परचम लहरा दिया है।

पख्तीका: अफगानिस्तान की वो ताकत, जहां से पाकिस्तान की हर चाल नाकाम

पाकिस्तान के 58 सैनिकों को मार गिराने के तालिबान के दावे ने दुनिया का ध्यान खींचा है। खासकर, अफगानिस्तान के उन आठ इलाकों में से एक, जिसने पाकिस्तान पर किए गए हमले में अहम भूमिका निभाई है। यह इलाका है अफगानिस्तान का पख्तीका प्रांत, जो पाकिस्तान के साथ सटी सीमा पर स्थित है। यह एक ऐसा रणनीतिक गढ़ है, जहां पाकिस्तान आज तक अपनी पहुंच नहीं बना पाया है और न ही उसे भेद पाया है। पख्तीका प्रांत पाकिस्तान के तीन अलग-अलग जिलों से सटा हुआ है, जो इसे पाकिस्तान के खिलाफ अफगानिस्तान की सबसे बड़ी फौजी ताकत बनाता है।

बदले की आग या अपनी रक्षा? सीमा पर भड़की हिंसा

यह नया संघर्ष शनिवार की रात करीब 10 बजे शुरू हुआ, जब अफगानिस्तानी तालिबान बलों ने साझा सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों पर हमला बोल दिया। तालिबान ने इसे “काबुल पर पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए हवाई हमलों का बदला” करार दिया। इस्लामाबाद ने सीधे तौर पर इन हमलों की जिम्मेदारी लेने से तो इनकार कर दिया है, लेकिन उसने बार-बार यह दोहराया है कि वह अफगानिस्तान की धरती से रची जा रही ‘बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों’ से अपनी रक्षा करने का पूरा हक रखता है।

क्षेत्रीय चिंताएं और सऊदी अरब की भूमिका

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भड़की हिंसा ने पूरे क्षेत्र में चिंताएं बढ़ा दी हैं। सऊदी अरब, कतर और ईरान जैसे कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। खासकर सऊदी अरब पर नजरें टिकी हैं, जिसने हाल ही में पाकिस्तान के साथ एक नाटो जैसा समझौता किया है, जिसके तहत एक देश पर हमला, दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह समझौता इस बार कितना प्रभावी होगा। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने तनाव कम करने, बातचीत को बढ़ावा देने और क्षेत्र में सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखने की दिशा में समझदारी से काम लेने का आह्वान किया है।


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