50 साल पुराना कानून बदलेगी ब्रिटिश सरकार: ग्रूमिंग गैंग सरगना शब्बीर अहमद पर शिकंजा कसने की बड़ी तैयारी!

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Grooming Gang सरगना Shabbir Ahmed पर नकेल, 50 साल पुराना Immigration Law बदलेगी UK की British Government

ब्रिटेन की संसद में शबाना महमूद ने एक ऐसा विधायी कदम उठाया है, जो ‘ग्रूमिंग गैंग’ के कुख्यात सरगना शब्बीर अहमद के निर्वासन की राह में खड़ी कानूनी बाधाओं को ध्वस्त कर सकता है। साल 2012 में नाबालिग लड़कियों के साथ दरिंदगी और यौन शोषण के संगीन जुर्म में सलाखों के पीछे पहुंचे अहमद को हाल ही में रिहा किया गया है। वर्तमान में वह 1971 के एक पुराने कानून की ढाल लेकर देश में टिका हुआ है, जो उन कॉमनवेल्थ नागरिकों के निर्वासन पर रोक लगाता है जो 50 साल से अधिक समय से ब्रिटेन में रह रहे हैं। सोमवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में महमूद ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संशोधन से होम सेक्रेटरी को वह विशेष शक्ति मिलेगी, जिससे गंभीर अपराधियों के मामले में इमिग्रेशन एक्ट 1971 की धारा 7 बेअसर हो जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस कदम मात्र से अहमद के तुरंत देश छोड़ने की गारंटी नहीं मिलती, लेकिन उसे बाहर निकालने की कोशिशें पूरी शिद्दत से जारी हैं और इसे सभी राजनीतिक दलों का अटूट समर्थन प्राप्त है। अहमद उस खौफनाक गिरोह का सरगना था, जो मासूम किशोरियों को खाने-पीने और सिगरेट का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था और फिर शराब पिलाकर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म करता था। 73 वर्षीय अहमद, जो दोहरी नागरिकता रखता है, इतना शातिर था कि पीड़ित लड़कियां उसे ‘डैडी’ कहकर बुलाने पर मजबूर थीं।

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सांसदों को संबोधित करते हुए महमूद ने जोर देकर कहा कि यह विधायी बदलाव शब्बीर अहमद जैसे घिनौने अपराधियों को सबक सिखाने के लिए ही लाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा संशोधन होम सेक्रेटरी को वह ताकत देगा जिससे 1971 के कानून की धारा 7 का सुरक्षा घेरा गंभीर अपराधियों के लिए खत्म हो जाएगा। लंबे समय तक रहने वालों को मिलने वाली सुरक्षा किसी भी हाल में शब्बीर अहमद जैसे दरिंदों के लिए बचाव का रास्ता नहीं बननी चाहिए।” महमूद ने स्पष्ट किया कि यह शक्ति सीधे तौर पर नागरिकता छीनने के प्रावधानों से जुड़ी होगी, जिसका इस्तेमाल केवल असाधारण और अति-गंभीर मामलों में ही किया जाता है। हालांकि, अहमद का मामला कूटनीतिक पेचों में भी फंसा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने फिलहाल उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और पर्दे के पीछे इस बात की चर्चा है कि उसकी वापसी को ब्रिटेन में मौजूद कुछ पाकिस्तानी असंतुष्टों के प्रत्यर्पण से जोड़ा जा रहा है। संसद में महमूद ने कहा, “यह समझना जरूरी है कि कानून बदलने भर से उसके निर्वासन की सौ फीसदी गारंटी नहीं मिल जाती, जैसा कि विपक्ष भी अपने अनुभव से जानता है। फिर भी, विदेश मंत्री और मैं उसे बाहर निकालने के लिए हर मुमकिन रास्ता अपना रहे हैं। इस दरिंदे के शिकार हुए लोगों के प्रति हम सभी की गहरी संवेदनाएं हैं।”

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यह पूरी कवायद ‘इमिग्रेशन एंड असाइलम बिल’ के व्यापक सुधारों का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य वास्तविक शरणार्थियों के लिए व्यवस्था को न्यायपूर्ण बनाना और अवैध रूप से आने वालों को तेजी से बाहर करना है। अहमद की ब्रिटिश नागरिकता उसकी 22 साल की सजा के दौरान ही खत्म कर दी गई थी। अब जेल से बाहर आने के बाद उसे कड़ी निगरानी में रखा गया है और एक GPS टैग के जरिए उसकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। इस प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष एक सुर में नजर आए। विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने इस “घिनौने गैंग-रेपिस्ट” के खिलाफ और भी सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिलप ने सुझाव दिया कि इस संशोधन को कानून बनने में एक साल का समय लग सकता है, इसलिए सरकार को सितंबर में ‘इमरजेंसी कानून’ लाकर महज कुछ हफ्तों में यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। अन्य सांसदों ने भी अहमद के कृत्य को “मानवता पर कलंक” बताते हुए कहा कि ओल्डहैम और रोचडेल जैसे कस्बों में मासूम बच्चियों के साथ हुए शोषण ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था, इसलिए उसे जल्द से जल्द देश से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।


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