हवाई श्रेष्ठता पर विवाद: फ्रांसीसी नौसेना ने पाकिस्तानी दावों को किया खारिज, भारत में तीखी प्रतिक्रिया
पेरिस/इस्लामाबाद/नई दिल्ली: फ्रांसीसी नौसेना ने रविवार को उन पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि मई 2025 में हुई एक हवाई लड़ाई के दौरान फ्रांस के एक वरिष्ठ कमांडर ने भारत पर पाकिस्तान की हवाई श्रेष्ठता की पुष्टि की थी। नौसेना ने इन रिपोर्टों को “बड़ी गलत जानकारी” करार देते हुए इन्हें पूरी तरह से असत्य बताया है।
पाकिस्तानी मीडिया का चौंकाने वाला दावा
यह पूरा विवाद पाकिस्तान के जियो टीवी द्वारा प्रकाशित एक लेख से शुरू हुआ। इस लेख में दावा किया गया था कि फ्रांसीसी नौसेना के कमांडर कैप्टन जैक्विस लौने ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक एक हवाई संघर्ष में पाकिस्तान की वायु सेना के दबदबे की पुष्टि की थी। लेख में आगे कहा गया था कि पाकिस्तानी वायु सेना “बेहतर तरीके से तैयार” थी और उनके चीनी J-10C फाइटर जेट की तकनीकी श्रेष्ठता के कारण फ्रांसीसी राफेल फाइटर जेट को गिराने में सफलता मिली।
फ्रांसीसी नौसेना का स्पष्टीकरण: “फेक न्यूज” का पर्दाफाश
पाकिस्तानी मीडिया के इन दावों पर फ्रांसीसी नौसेना ने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की। नौसेना ने इन रिपोर्टों को “फेक न्यूज” बताते हुए कहा, “ये बयान कैप्टन लौने के नाम से दिए गए थे, जिन्होंने किसी भी प्रकाशन के लिए कभी अपनी मंजूरी नहीं दी थी। आर्टिकल में बहुत ज्यादा गलत जानकारी और तथ्यहीन बातें हैं।” नौसेना के इस स्पष्टीकरण ने पाकिस्तानी मीडिया की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
भारत में तीखी प्रतिक्रिया: “हताश गलत जानकारी” का आरोप
इस घटना पर भारत में ऑनलाइन तीखी आलोचना हुई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अमित मालवीय ने इसे पाकिस्तान की “हताश गलत जानकारी देने वाली मशीनरी” का एक और सबूत बताया। मालवीय ने ट्वीट किया, “जब सरकारी संस्थाएं उनके प्रोपेगैंडा को गलत साबित करना शुरू करती हैं, तो यह दिखाता है कि पाकिस्तान की गलत जानकारी फैलाने वाली मशीनरी कितनी हताश हो गई है।” कई अन्य भारतीय उपयोगकर्ताओं ने भी इसी तरह पाकिस्तानी मीडिया की आलोचना की, जो अक्सर भारत के खिलाफ बेबुनियाद और मनगढ़ंत दावे करने के लिए जाना जाता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’: एक कड़वी याद
यह पूरा विवाद मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ा हुआ है। यह सैन्य कार्रवाई भारत ने पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले के जवाब में शुरू की थी, जिसमें 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी। भारत की इस त्वरित और निर्णायक कार्रवाई से पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद, इस्लामाबाद के अनुरोध पर, दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम (सीजफायर) के लिए सहमति व्यक्त की थी।
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