संयुक्त राष्ट्र महासभा में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति का ‘ओम शांति ओम’ से भाषण, दुनिया अचंभित!
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में एक ऐसा पल आया जिसने न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, जो स्वयं भी एक मुस्लिम हैं, ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से ‘ओम शांति ओम’ का उच्चारण किया। यह भाषण इस समय इंटरनेट पर धूम मचा रहा है और हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्नोबोवो सुबियांतो ने अपने संबोधन का समापन ‘ओम शांति ओम’ के साथ किया। यह केवल एक शब्द नहीं था, बल्कि उनके भाषण में कई ऐसे दमदार मुद्दे भी उठाए गए, जिन पर उनका दूरदर्शी दृष्टिकोण दुनिया को चकित कर रहा है।
‘ओम शांति ओम’ की गूँज और भारत में प्रतिक्रिया
एक मुस्लिम देश के मुस्लिम राष्ट्रपति के मुख से ‘ओम शांति ओम’ सुनकर भारत में बैठे कुछ तथाकथित कट्टरपंथी और बुद्धिजीवी सदमे में हैं। यह खबर अब आप तक भी पहुँच चुकी होगी कि अमेरिका में दुनियाभर के नेता संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने विचार रखने पहुंचे हैं। इस बार भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कर रहे हैं। बहरहाल, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबियांतो ने जब अपना भाषण समाप्त करते हुए ‘ओम शांति शांति ओम’ कहा, तो उपस्थित सभी लोग स्तब्ध रह गए।
यह सर्वविदित है कि इंडोनेशिया भले ही दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश हो, लेकिन इस भूमि पर सनातन संस्कृति की छाप गहरी है। भगवान राम, हनुमान, राम मंदिर और रामलीला यहाँ की सभ्यता का अभिन्न अंग हैं। यह आश्चर्यजनक है कि भारत के कुछ लिबरल हिंदुओं की तुलना में इंडोनेशिया के मुसलमान भगवान राम में अधिक आस्था रखते हैं, और शायद यही कारण है कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ‘ओम शांति’ का उद्घोष करते हैं।
गाजा पर फिलिस्तीन-इजरायल समाधान पर इंडोनेशिया का रुख
सबसे बड़े मुस्लिम देश के राष्ट्रपति होने के बावजूद, सुबियांतो ने फिलिस्तीन के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए भी इजरायल की सुरक्षा को मान्यता देने की बात कही। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि वे फिलिस्तीन में द्वि-राज्य समाधान का पूर्ण समर्थन करते हैं। उनका मानना था कि "हमें एक स्वतंत्र फिलिस्तीन चाहिए, लेकिन हमें इजरायल की सुरक्षा और संरक्षा को भी मान्यता देनी होगी, उसका सम्मान करना होगा और उसकी गारंटी भी देनी होगी। तभी हम सच्ची शांति, सच्ची शांति पा सकेंगे और नफरत और संदेह दूर होंगे।"
इस संदर्भ में, इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो ने यह भी बताया कि प्रोबोवो ने गाजा पर राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा आयोजित एक बहुपक्षीय बैठक में भी भाग लिया था, जिसमें मिस्र, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया था।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबियांतो का यह भाषण संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक ऐतिहासिक क्षण बन गया, जिसने वैश्विक मंच पर सद्भाव और शांति के एक अनूठे संदेश को प्रसारित किया।
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