गाजा में शांति की किरण: हजारों फलस्तीनी लौटे, पर भविष्य अनिश्चित
अमेरिका की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम समझौते के लागू होने के बाद शुक्रवार को हजारों फलस्तीनी उत्तरी गाजा लौट आए, जिससे इजराइल और हमास के बीच लंबे चले युद्ध के अंत की उम्मीदें जगी हैं। इस समझौते के तहत हमास द्वारा शेष सभी बंधकों को कुछ ही दिनों में रिहा कर दिया जाएगा। हालांकि, इस शांति के बीच भी कई सवाल अनसुलझे हैं। इजराइली सैनिकों के पीछे हटने के बाद गाजा का शासन कौन संभालेगा और क्या हमास, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्धविराम योजना के अनुसार हथियार डाल देगा?
पिछले तनाव और भविष्य की चुनौतियाँ
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मार्च में युद्धविराम समझौते को एकतरफा तरीके से समाप्त कर दिया था। इस बार भी उन्होंने संकेत दिया है कि यदि हमास हथियार नहीं डालता है, तो इजराइल अपने आक्रमण को फिर से शुरू कर सकता है। युद्ध की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजराइल पर किए गए हमले से हुई थी, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके जवाब में इजराइल के सैन्य हमले में हजारों फलस्तीनी मारे गए, गाजा तबाह हो गया और वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई।
मानवीय क्षति और भविष्य की राह
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 67,000 से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं और लगभग 170,000 घायल हुए हैं। समझौते के तहत, शेष 48 बंधकों को सोमवार तक रिहा कर दिया जाएगा, जिनमें से लगभग 20 के जीवित होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि अगले चरण में हमास को निरस्त्र किया जाएगा और गाजा को विसैन्यीकृत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हमास ने यह समझौता “जब उसे लगा कि तलवार अब भी उसकी गर्दन पर लटक रही है” तभी स्वीकार किया। एक इजराइली सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि सेना गाजा के लगभग 50 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखेगी, जिससे भविष्य की स्थिति पर और भी अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
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