बांग्लादेश में चुनावी हवाएँ और न्याय की तलवार: 15 सैन्य अधिकारियों का जेल जाना
ढाका: बांग्लादेश में आगामी चुनावों से पहले, देश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 15 सैन्य अधिकारियों को जेल भेजने का आदेश दिया है। यह आदेश अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर अंजाम दिए गए जबरन गायब किए जाने, हत्याओं और मानवता के खिलाफ अन्य अपराधों से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में लिया गया है।
आश्चर्यजनक रूप से, जिन सैन्य अधिकारियों पर यह कार्रवाई हुई है, उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी माना जाता था। जस्टिस गुलाम मुर्तुजा मजूमदार की अध्यक्षता वाली आईसीटी-1 की तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार की सुबह एक याचिका पर सुनवाई के बाद यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया।
जानकारी के अनुसार, आरोपी अधिकारियों ने जमानत की अर्जी दायर की थी, लेकिन न्यायाधिकरण ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे भेजने का हुक्म दिया। मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने इस फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा, “न्यायाधिकरण ने जबरन गुमशुदगी और हत्या के मामलों में आज पेश किए गए 15 सैन्य अधिकारियों को जेल भेजने का आदेश दिया है।”
बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट यूएनबी की रिपोर्टों के अनुसार, इन तीन गंभीर मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत कुल 34 लोगों को नामजद किया गया है। वहीं, कुल 25 सैन्य अधिकारियों पर आरोप हैं, जिनमें से 15 फिलहाल हिरासत में हैं।
इससे पहले, 11 अक्टूबर को, बांग्लादेशी सेना मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी कि आईसीटी में तीन मामलों में औपचारिक रूप से आरोपित किए जाने के बाद 15 अधिकारियों को सैन्य हिरासत में ले लिया गया है। यह ध्यान देने योग्य है कि जिन 25 सैन्य अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनमें से नौ लोग या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या निलंबित हैं।
बांग्लादेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘द बिजनेस स्टैंडर्ड’ ने बांग्लादेशी सेना के एडजुटेंट जनरल मेजर जनरल मोहम्मद हकीमुज्जमां के हवाले से बताया कि “कुल 15 आरोपी अधिकारी अब सेना की हिरासत में हैं, जबकि एक अधिकारी का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। वह एक सुबह अपने घर से निकला था और तब से वापस नहीं लौटा है। उसके ठिकाने का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।”
इन सैन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी पर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने देश की अंतरिम सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा था कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के शासन में बांग्लादेश में कानून का कोई राज नहीं है।
नौगांव में पार्टी नेताओं के साथ एक वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए हसीना ने कड़ा सवाल उठाया, “मैं इस बात से स्तब्ध हूं कि सेना से इन अधिकारियों को कानून के हवाले करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। कानून कहां है? इस देश में कानून का कोई राज नहीं है। यह सरकार नाजायज है, और इसके सभी कार्य गैरकानूनी हैं। इन अधिकारियों को ऐसी सरकार के हवाले क्यों किया जाना चाहिए?”
आईसीटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए हसीना ने आगे कहा, “हमने बांग्लादेश की आजादी का विरोध करने वालों पर मुकदमा चलाने के लिए न्यायाधिकरण की स्थापना की थी। हालांकि, उन्होंने न्यायाधिकरण के कानूनों में इतने बड़े पैमाने पर संशोधन कर दिए हैं कि यह ‘यूनुस कोर्ट’ या ‘जमात कोर्ट’ बन गया है—एक ऐसी अदालत जो युद्ध अपराधियों द्वारा नियंत्रित है।”
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