अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों और ईरान के इनकार के बीच तेहरान में सत्ता की बिसात पूरी तरह बदल चुकी है। ट्रंप ने संकेत दिया था कि युद्ध विराम के लिए उनकी बातचीत ईरान के उदारवादी और समझदार नेताओं से चल रही है, लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। ‘ईरान इंटरनेशनल’ की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और शक्तिशाली ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) के बीच जारी खींचतान में अब IRGC ने प्रभावी रूप से सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। सुधारवादी नेता माने जाने वाले पेज़ेशकियान इस समय एक गंभीर राजनीतिक गतिरोध में फंस गए हैं, जबकि अमेरिकी हमलों के जवाब में सैन्य कमान संभाल रही IRGC अब सरकार के प्रमुख कार्यों और फैसलों को सीधे नियंत्रित कर रही है।
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कहाँ गायब हैं मोजतबा खामेनेई?
ईरान में सत्ता के इस बड़े फेरबदल का सबसे बड़ा कारण सर्वोच्च नेता के पद को लेकर बना रहस्य है। संघर्ष की शुरुआत में हुए भारी हमलों के बाद से अयातुल्ला अली खामेनेई और शीर्ष नेतृत्व का कोई अता-पता नहीं है। अयातुल्ला के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता तो नामित किया गया, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से वे सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। उनके संदेश केवल लाइव टीवी पर पढ़े जा रहे हैं, जिससे उनकी सलामती पर सवाल उठ रहे हैं। अटकलें तो यहाँ तक हैं कि मोजतबा की मृत्यु हो चुकी है या वे कोमा में हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनकी हालत नाजुक होने के संकेत दिए हैं, वहीं अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि एक हमले में उनका चेहरा “विकृत” हो गया है।
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IRGC का पूर्ण नियंत्रण
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, अब वरिष्ठ IRGC अधिकारियों की एक ‘सैन्य परिषद’ देश के रोजमर्रा के फैसले ले रही है। IRGC ने मोजतबा खामेनेई के चारों ओर सुरक्षा का ऐसा अभेद्य घेरा बना लिया है कि देश की महत्वपूर्ण सरकारी रिपोर्टें भी उन तक नहीं पहुँच पा रही हैं। सूत्रों का दावा है कि राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने सर्वोच्च नेता से मिलने के कई अनुरोध किए, जिन्हें IRGC ने सिरे से खारिज कर दिया। पिछले कई दिनों से राजनीतिक नेतृत्व और मोजतबा के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, IRGC ने राष्ट्रपति द्वारा की जाने वाली नई नियुक्तियों पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे सरकार की मशीनरी पंगु हो गई है।
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