ईरान में मोसाद के ‘जासूसों’ पर कड़ा प्रहार: परमाणु रहस्यों की जासूसी के आरोप में दो को फांसी
ईरान ने शनिवार को न्याय के नाम पर दो और जिंदगियों का अंत कर दिया, जिन पर इजरायल के लिए जासूसी करने का संगीन आरोप था। इनमें से एक शख्स पर मध्य इस्फ़हान प्रांत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘नतान्ज़ परमाणु स्थल’ के पास खुफिया जानकारी जुटाने का दोष था। ईरानी मीडिया के अनुसार, न्यायपालिका ने यागुब करीमपुर और नासिर बकरज़ादेह को इजरायली जासूसी एजेंसी ‘मोसाद’ के साथ खुफिया सहयोग का दोषी पाते हुए मौत की सजा दी। करीमपुर पर मोसाद अधिकारी को संवेदनशील डेटा लीक करने का आरोप था, जबकि बकरज़ादेह सरकारी और धार्मिक हस्तियों सहित नतान्ज़ जैसे महत्वपूर्ण स्थलों की टोह ले रहा था।
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यह घटनाक्रम महज दो सप्ताह के भीतर ईरान में हुई दूसरी बड़ी फांसी है। इससे पहले 20 अप्रैल को भी दो व्यक्तियों—मोहम्मद मासूम शाही और हामेद वलीदी—को मोसाद से जुड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा होने और इराक के कुर्दिस्तान में प्रशिक्षण लेकर हमले की साजिश रचने के आरोप में फांसी दी गई थी। हालांकि, ईरान के पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन (जिससे वे कथित तौर पर जुड़े थे) ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। पेरिस स्थित ईरान के राष्ट्रीय प्रतिरोध परिषद की निर्वाचित अध्यक्ष मरियम रजावी ने ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उनका एकमात्र “अपराध” अपने लोगों की मुक्ति और स्वतंत्रता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता थी।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से (जब से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है) अब तक ईरान कम से कम 21 लोगों को फांसी दे चुका है और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर 4,000 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, “मैं अधिकारियों से आग्रह करता हूँ कि फांसी की सजाओं पर तत्काल रोक लगाएं, मृत्युदंड के प्रयोग को रोकें और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करें।” उन्होंने मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की भी मांग की। मानवाधिकार समूहों का तर्क है कि ईरानी प्रशासन विरोधियों की आवाज कुचलने के लिए इन कठोर सजाओं का सहारा ले रहा है, विशेषकर 1979 की क्रांति के बाद हुए सबसे भीषण सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद से देश में दमन का चक्र तेज हो गया है।
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