केपी ओली का 18 दिन का मौन टूटा: नेपाल की नई दिशा?

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Nepal: 18 दिन बाद सामने आए केपी ओली, जानिए क्या कहा

ओली की वापसी: युवा शक्ति के सामने पूर्व पीएम का बचाव

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने शनिवार को सार्वजनिक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। कुछ ही समय पूर्व जेन-जेड विरोध प्रदर्शनों के तूफ़ान के बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले ओली, अब अपनी नई भूमिका में नज़र आए।

भक्तपुर में सीपीएन-यूएमएल की छात्र शाखा, राष्ट्रीय युवा संघ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री की शिरकत, राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। इस कदम को ओली द्वारा पार्टी की युवा इकाई के साथ जुड़ने की एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि यही युवा शाखा, देश में जेनरेशन-ज़ेड के विरोध प्रदर्शनों से निपटने के ओली के तरीके की तीखी आलोचना करती रही है।

73 वर्षीय ओली ने इस दौरान अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए जोर दिया कि उनकी सरकार ने कभी भी पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया। उन्होंने कहा, “मेरी सरकार ने पुलिस को कभी भी प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया। जाँच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि किसने ऐसे स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया जो पुलिस के पास नहीं थे।” उन्होंने आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वालों की भी आलोचना की और इन कृत्यों को ‘जानबूझकर’ किया गया बताया।

नेपाल में हुए इन विरोध प्रदर्शनों ने देश को हिलाकर रख दिया था, जिसमें कम से कम 74 लोगों की जान गई, जिनमें से अधिकांश युवा थे। ये विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से फेसबुक, एक्स और यूट्यूब सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाए गए सरकारी प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए थे। हालांकि प्रतिबंध हटा लिया गया, लेकिन विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा, जिसके चलते अंततः ओली सरकार को सत्ता गंवानी पड़ी।

प्रदर्शनकारी पारदर्शिता और सुधारों की मांग कर रहे थे। इस दौरान सिंह दरबार, नेपाली सुप्रीम कोर्ट, संघीय संसद और शीतल निवास जैसी प्रतिष्ठित सरकारी संपत्तियों को भी निशाना बनाया गया।

इन विरोध प्रदर्शनों के बाद, पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। कार्की ने अगले साल 5 मार्च तक ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ चुनाव कराने का संकल्प लिया है। उनकी सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से मौजूदा चुनाव कानून में संशोधन कर 18 साल की उम्र पार कर चुके नागरिकों को भी मतदान का अधिकार प्रदान किया है।


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