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ईरान की नई ‘चाल’ पर मार्को रुबियो का कड़ा रुख: ‘परमाणु हथियार रोकने तक कोई समझौता मंजूर नहीं’— रुबियो ने ईरान के नए प्रस्ताव को समय हासिल करने की रणनीति बताते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य उसे परमाणु संपन्न होने से रोकना है। उन्होंने वर्तमान शासन को अविश्वसनीय करार दिया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हुंकार भरते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका के लिए आज भी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। फॉक्स न्यूज को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रुबियो ने ईरान के उस नए प्रस्ताव की पोल खोल दी, जिसे वह वैश्विक स्तर पर बातचीत के मेज पर रख रहा है।
ईरान के हालिया प्रस्ताव के मुताबिक, वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को आगे टालने का इच्छुक है। हालांकि, इसके बदले उसने बड़ी शर्तें रखी हैं। ईरान की मांग है कि यदि अमेरिका उस पर लगी आर्थिक नाकाबंदी हटा ले और जारी युद्ध को समाप्त कर दे, तो वह सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अपना नियंत्रण छोड़ देगा।
इस कूटनीतिक दांव पर रुबियो ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुझे अटूट विश्वास है कि यदि ईरान में मौजूदा कट्टरपंथी शासन बना रहता है, तो वे भविष्य में परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश जरूर करेंगे।” उन्होंने आगाह किया कि असली समस्या का समाधान अभी भी नहीं हुआ है और यही पूरी बहस का मुख्य केंद्र है।
जब रुबियो से पूछा गया कि क्या ईरान वाकई बातचीत को लेकर गंभीर है, तो उन्होंने दो-टूक कहा कि ईरानी पक्ष बेहद माहिर वार्ताकार हैं और यह सब केवल समय हासिल करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
रुबियो ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हम उन्हें समय बर्बाद करने की छूट कतई नहीं दे सकते।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कोई भी भविष्य का समझौता ऐसा होना चाहिए जो ईरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार की दिशा में निश्चित बढ़त हासिल करने से पूरी तरह रोके।
डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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