पश्चिम एशिया की रणभूमि अब सत्ता के संघर्ष, प्रतिशोध की ज्वाला और जटिल रणनीतियों के एक ऐसे खतरनाक चौराहे पर खड़ी है, जहां हर कदम विनाश की आहट दे रहा है। ताजा और सनसनीखेज रिपोर्टों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है—दावा किया जा रहा है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों में गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में चले गए हैं। उनके शरीर पर जख्म इतने गहरे हैं कि उनका एक पैर काटना पड़ा है और आंतरिक अंगों, विशेषकर पेट और यकृत को भारी क्षति पहुंची है। तेहरान का सिना विश्वविद्यालय अस्पताल इस समय एक अभेद्य किले में तब्दील हो चुका है, जहां मोजतबा की सांसे बेहद नाजुक दौर से गुजर रही हैं।
यह विडंबना ही है कि अपने पिता अली खामेनेई के निधन के बाद जैसे ही सत्ता की विरासत मोजतबा के हाथों में आई, उसके कुछ ही घंटों के भीतर उन पर यह प्राणघातक प्रहार हो गया। नेतृत्व संभालते ही सर्वोच्च नेता का इस तरह जीवन और मृत्यु के बीच झूलना, ईरान की सत्ता व्यवस्था के लिए एक बड़ा आघात है। इस घटना ने न केवल नेतृत्व की स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि देश के राजनीतिक और सैन्य तंत्र के भीतर असुरक्षा और बेचैनी की एक गहरी लहर पैदा कर दी है।
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इस रहस्यमयी घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि मोजतबा खामेनेई शायद अभी जीवित तो हैं, लेकिन वे उस अवस्था में नहीं हैं कि देश संभाल सकें। युद्ध की शुरुआत के बाद से मोजतबा का सार्वजनिक पटल से ओझल रहना इस सस्पेंस को और गहरा कर देता है कि आखिर पर्दे के पीछे चल क्या रहा है।
हालांकि, इन खबरों के बीच मोजतबा खामेनेई के नाम से जारी एक कड़े संदेश ने पूरे क्षेत्र में बारूद की गंध और तेज कर दी है। अपने पहले औपचारिक बयान में उन्होंने ऐलान किया है कि ईरान अपने एक-एक शहीद का हिसाब चुकता करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिशोध की यह आग तब तक नहीं बुझेगी जब तक हर मौत का बदला न ले लिया जाए। विशेष रूप से मिनाब के शजरा तय्यिबा स्कूल पर हुए हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों और महिलाओं का खून ईरान की नीति को और अधिक आक्रामक बना चुका है। ईरान अब इस घटना को वैश्विक स्तर पर एक ‘प्रतीकात्मक युद्ध अपराध’ के रूप में पेश कर अंतरराष्ट्रीय संवेदनाएं बटोरने की जुगत में है।
खामेनेई ने ‘प्रतिरोध की धुरी’ यानी हिजबुल्लाह, हूती विद्रोहियों और इराकी गुटों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि ये संगठन इजरायली साजिशों के खिलाफ एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े हैं। उनका यह रुख साफ संकेत देता है कि यह जंग अब दो देशों की सीमा लांघकर पूरे मध्य-पूर्व को अपनी चपेट में लेने वाली है। साथ ही, उन्होंने उन देशों को भी अंतिम चेतावनी दी है जो अमेरिकी सैन्य अड्डों को अपनी जमीन मुहैया करा रहे हैं। खामेनेई ने दो टूक कहा कि यदि ये ठिकाने बंद नहीं हुए, तो इन्हें सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा।
ईरान की रणनीति का सबसे घातक पत्ता ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ है। खामेनेई ने इस वैश्विक लाइफलाइन को बंद करने की धमकी को फिर से दोहराया है। दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है, और यदि ईरान इसे बाधित करता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और दुनिया की अर्थव्यवस्था में ऐसा भूचाल आएगा जिसे संभालना नामुमकिन होगा।
जवाब में इजराइल ने भी अपने तेवर और तीखे कर लिए हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दहाड़ते हुए कहा कि आतंकी आकाओं के पास अब कोई ‘लाइफ इंश्योरेंस’ नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि मोजतबा खामेनेई और हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम जैसे चेहरे इजराइल की ‘हिट लिस्ट’ में सबसे ऊपर हैं। नेतन्याहू ने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल की जुगलबंदी ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और बसिज बलों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने ईरानी जनता को सीधे संबोधित करते हुए ‘क्रांति’ का आह्वान किया और कहा कि अब अपने भविष्य को बदलने का समय आ गया है।
नेतन्याहू और ट्रंप के बीच हर दिन होती रणनीतिक चर्चाएं यह तस्दीक करती हैं कि यह हमला केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक और सुनियोजित सैन्य अभियान है। यदि मोजतबा खामेनेई वास्तव में कोमा में हैं, तो ईरान के भीतर एक बड़ा नेतृत्व संकट पैदा हो सकता है, जो युद्ध के समय किसी भी राष्ट्र के लिए घातक होता है। हालांकि, ईरान का सैन्य ढांचा इतना विकेंद्रीकृत है कि वह नेतृत्व के बिना भी संघर्ष जारी रखने की क्षमता रखता है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह रण अब एक ऐसे मुकाम पर है जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं दिखता। होरमुज की नाकेबंदी से लेकर कई मोर्चों पर फैलती इस जंग का असर केवल क्षेत्रीय नहीं होगा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को तहस-नहस करने की ताकत रखती है। दुनिया अब सांस रोककर देख रही है कि इस रणनीतिक बिसात पर अगली चाल किसकी होगी।
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