नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले में ‘सनसनीखेज मोड़’ की दस्तक: क्या सुलझेगी पीएनबी धोखाधड़ी की गुत्थी?
भगोड़े भारतीय व्यवसायी नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालत में दावा किया है कि आगामी नवंबर माह में उनके भारत प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई के दौरान ‘सनसनीखेज घटनाक्रम’ देखने को मिलेगा। यह बयान उन्होंने 6,498 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी के आरोपी के तौर पर लंदन के रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में दिया। यह टिप्पणी बैंक ऑफ इंडिया के 80 लाख डॉलर के बकाया कर्ज से संबंधित एक अलग कानूनी कार्यवाही के दौरान आई, जिसने मामले में एक नया आयाम जोड़ दिया है।
मार्च 2019 में गिरफ्तारी के बाद से ही 54 वर्षीय नीरव मोदी लंदन की जेल में बंद हैं। वह धोखाधड़ी और धन शोधन के आरोपों में भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। खुद को ‘व्यक्तिगत रूप से वादी’ बताते हुए, मोदी ने अदालत में हस्तलिखित नोट पढ़े, जिनमें उन्होंने अपनी कमजोर दृष्टि और जेल में कंप्यूटर तक पहुंच न होने के कारण कानूनी प्रक्रिया में अनुचितता का तर्क दिया।
प्रत्यर्पण अपील में नया मोड़: क्या होगी ‘सनसनीखेज’ घटना?
ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने पुष्टि की है कि नीरव मोदी ने अपनी प्रत्यर्पण अपील को फिर से खोलने के लिए औपचारिक आवेदन दायर किया है। भारत सरकार ने इस पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है और मामले की सुनवाई नवंबर के अंत में निर्धारित है। यह घटनाक्रम ब्रिटेन के गृह मंत्रालय द्वारा उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दिए जाने के बाद आया है, जिसने इस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई को और भी जटिल बना दिया है।
नीरव मोदी ने उम्मीद जताई है कि अदालत द्वारा नए सबूत स्वीकार किए जाने पर उन्हें या तो बरी कर दिया जाएगा या जमानत मिल जाएगी। हालांकि, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने तकनीकी या चिकित्सीय आधार पर मुकदमे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। उन्होंने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर कंप्यूटर तक पहुंच सहित सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करें।
पीएनबी घोटाला: एक विशाल आर्थिक अपराध की पृष्ठभूमि
नीरव मोदी जनवरी 2018 में भारत से तब भागे थे, जब यह बहुचर्चित बैंकिंग घोटाला सामने आया था। उन पर और उनके मामा मेहुल चोकसी पर आरोप है कि उन्होंने बिना उचित मंजूरी या जमानत के फर्जी ‘लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग’ प्राप्त करके पीएनबी को धोखा दिया। इस घोटाले के कारण पीएनबी को एसबीआई (मॉरीशस और फ्रैंकफर्ट), इलाहाबाद बैंक (हांगकांग) और अन्य अंतरराष्ट्रीय बैंकों को भारी भुगतान करना पड़ा, जबकि मोदी की कंपनियां ऋण चुकाने में विफल रहीं।
मुंबई की एक अदालत ने 2020 में उन्हें ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किया था और उनकी संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया था। ब्रिटेन में उनकी जमानत की कई कोशिशें, विदेश भागने की आशंका के चलते, पहले ही खारिज की जा चुकी हैं। अब देखना यह है कि नवंबर में होने वाली सुनवाई में नीरव मोदी के ‘सनसनीखेज घटनाक्रम’ का दावा कितना सच साबित होता है और क्या यह पीएनबी घोटाले के मामले में किसी निर्णायक मोड़ की ओर ले जाएगा।
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