पाकिस्तान का पाखंड: पाक मंत्री का हाफिज सईद के संगठन से रिश्ता, दुनिया के सामने फिर आया सच

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
6 Min Read
Pakistan का दोहरा चेहरा फिर हुआ बेनकाब, Terrorist Hafiz Saeed के संगठन के दरवाज़े पर पहुँचा शहबाज शरीफ का मंत्री

पाकिस्तान: सत्ता का दोहरा मापदंड और आतंकवाद का स्याह सच

पाकिस्तान की सत्ता एक बार फिर अपने पुराने रंग में लौट आई है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का दम भरते हुए, उसके मंत्री प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के राजनीतिक मुखौटों से मिलते-जुलते दिखाई दे रहे हैं। यह दोगलापन न केवल दक्षिण एशिया की शांति के लिए एक बड़ा खतरा है, बल्कि यह भी साबित करता है कि पाकिस्तान की तथाकथित लोकतांत्रिक व्यवस्था अभी भी आतंकवाद के साये से मुक्त नहीं हो पाई है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ के करीबी, तलाल चौधरी, ने फैसलाबाद में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा के राजनीतिक धड़े, पाकिस्तान मार्कज़ी मुस्लिम लीग (PMML) के नेताओं से मुलाकात की। यह वही जमात है जिसका प्रमुख हाफ़िज़ सईद 26/11 के मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है। सूत्रों की मानें तो, तलाल चौधरी ने PMML कार्यालय में “राजनीतिक स्थिरता” और “लोकतांत्रिक निरंतरता” जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। PMML ने अपने बयान में सभी राजनीतिक दलों से “सामंजस्य और सहयोग” की दिशा में एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। यह भाषा ऊपर से भले ही लोकतांत्रिक लगे, लेकिन इसका गहरा मतलब उस संगठन को राजनीतिक वैधता प्रदान करना है जिसकी जड़ें आतंकवाद में गहरी पैठी हुई हैं।

पाकिस्तान की राजनीति में आतंकवादी संगठनों का दखल कोई नई बात नहीं है। परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल से लेकर इमरान खान तक, चरमपंथी समूहों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए होता रहा है। लेकिन अब जब शाहबाज़ शरीफ़ की सरकार के मंत्री खुद ऐसे संगठनों से “लोकतांत्रिक सहयोग” की बात कर रहे हैं, तो यह इस्लामाबाद में सत्ता के खोखले चरित्र को उजागर करता है।

यह वही पाकिस्तान है जो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट से निकलने के लिए दुनिया के सामने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का ढोंग करता रहा। लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय दबाव कम हुआ, आतंकी नेटवर्कों के साथ राजनीतिक गठजोड़ फिर से खुल कर सामने आने लगे।

भारत के लिए, यह घटना एक बार फिर इस बात की पुष्टि करती है कि पाकिस्तान की सरकार और आतंकी संगठन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद PMML की बढ़ी हुई गतिविधियां, जो सरकार के संरक्षण में चल रही थीं, पाकिस्तान की “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” की नीति को स्पष्ट करती हैं। भारत जब भी शांति की पहल करता है, पाकिस्तान अपनी जमीन पर बैठे आतंकी नेटवर्कों को उसी वक्त फिर से सक्रिय कर देता है।

यह घटनाक्रम नई दिल्ली को यह स्पष्ट संकेत देता है कि इस्लामाबाद की किसी भी “लोकतांत्रिक” सरकार से उम्मीदें रखना व्यर्थ है। चाहे सत्ता में नवाज़ शरीफ़ हों, इमरान खान हों या शाहबाज़ शरीफ़, पाकिस्तान की नीति अपरिवर्तित रहती है: आतंकवाद को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना और उसे “राष्ट्रीय हित” का नाम देना।

यह स्थिति न केवल भारत, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका और पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान को बार-बार चेतावनी दी है कि आतंकवाद से जुड़े संगठनों को मुख्यधारा की राजनीति में लाना FATF के सिद्धांतों का उल्लंघन है। यदि ऐसे संपर्क जारी रहे, तो पाकिस्तान को दोबारा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

सामरिक दृष्टि से, यह कदम दो खतरनाक संकेत देता है: पहला, पाकिस्तान अपनी आंतरिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए आतंक समर्थक समूहों को “राजनीतिक साझेदार” के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जो चरमपंथ को संस्थागत समर्थन प्रदान करता है। दूसरा, यह भारत और अफगानिस्तान दोनों के खिलाफ भविष्य में अधिक संगठित आतंकवादी कार्रवाइयों का संकेत हो सकता है।

तलाल चौधरी की यह मुलाकात केवल एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस पाकिस्तान का प्रतीक है जो अंतरराष्ट्रीय दबाव में आतंकवाद से दूरी का दिखावा करता है, लेकिन भीतर से उसी नेटवर्क को पाल-पोस रहा है। लोकतंत्र के नाम पर आतंकी चेहरों को वैधता देने की यह राजनीति पाकिस्तान की सबसे बड़ी विडंबना है। इस्लामाबाद को यह समझना होगा कि आतंकवाद और लोकतंत्र साथ-साथ नहीं चल सकते। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी रणनीति का औजार बनाए रखेगा, तब तक न केवल उसकी वैश्विक साख गिरती जाएगी, बल्कि दक्षिण एशिया की शांति भी उसकी बंधक बनी रहेगी।

संक्षेप में, पाकिस्तान का यह “राजनीतिक आतंकीकरण” उसके अपने भविष्य के लिए भी विनाशकारी साबित हो सकता है, क्योंकि जो देश अपने गुनाहों को “राजनीतिक प्रक्रिया” में शामिल कर लेता है, वह अंततः अपने ही भीतर के विस्फोट से नष्ट हो जाता है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version