सीरिया में एक नए युग की आहट: कुर्दों को मिला ऐतिहासिक सम्मान और खोई हुई पहचान
सीरिया के राजनीतिक क्षितिज पर बदलाव की एक ऐतिहासिक लहर उठी है। अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने एक क्रांतिकारी राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर देश के कुर्द अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को पहली बार औपचारिक मान्यता दी है। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि दशकों की उपेक्षा को खत्म कर कुर्दों को सीरियाई राष्ट्र के ढांचे में पूरी तरह एकीकृत करने की एक बड़ी पहल है। उत्तरी सीरिया में जारी भारी तनाव के बीच आया यह फैसला कुर्द भाषा को ‘राष्ट्रीय भाषा’ का गौरव देने और हजारों राज्यविहीन कुर्दों को उनकी नागरिकता लौटाने का संकल्प व्यक्त करता है।
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वर्ष 2026 के अध्यादेश संख्या 13 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कुर्द मूल के लोग सीरियाई जनता का एक अनिवार्य और अटूट हिस्सा हैं। इस अध्यादेश के जरिए यह स्वीकार किया गया है कि उनकी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान राष्ट्र की विविधता का अभिन्न अंग है। अब कुर्द भाषा को अरबी के साथ ‘राष्ट्रीय भाषा’ का दर्जा प्राप्त होगा और जिन क्षेत्रों में कुर्द समुदाय की सघनता है, वहां के सार्वजनिक और निजी विद्यालयों में इसे पढ़ाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, 21 मार्च को मनाए जाने वाले कुर्द नव वर्ष ‘नवरोज़’ को अब वसंत और भाईचारे के प्रतीक के रूप में पूरे देश में सवैतनिक सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। अल जज़ीरा के अनुसार, सरकार ने सीरियाई संप्रभुता के दायरे में इस विरासत और कला को संरक्षित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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इस अध्यादेश का एक अत्यंत मानवीय और महत्वपूर्ण पहलू हसाका प्रांत में 1962 की उस विवादास्पद जनगणना के भेदभावपूर्ण प्रभाव को खत्म करना है, जिसने अनगिनत कुर्दों को अपनी ही मिट्टी पर बेगाना (राज्यविहीन) बना दिया था। नया कानून उन सभी को पूर्ण नागरिकता और समान अधिकार प्रदान करता है। साथ ही, यह जातीय या भाषाई आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को प्रतिबंधित करता है और सरकारी संस्थानों व मीडिया को एक समावेशी राष्ट्रीय संवाद की दिशा में बढ़ने का निर्देश देता है। नफरत या जातीय संघर्ष भड़काने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है, जो एक दशक के गृहयुद्ध के बाद राष्ट्रीय एकता को बहाल करने की एक गंभीर कोशिश है।
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हालांकि, सुधारों की यह चमक संघर्ष और अविश्वास की काली छाया के बीच उभरी है। एक तरफ जहां अधिकारों की घोषणा हो रही है, वहीं उत्तरी अलेप्पो में सरकारी सेना और कुर्द नेतृत्व वाली ‘सीरियाई लोकतांत्रिक बलों’ (एसडीएफ) के बीच हालिया झड़पों ने 23 लोगों की जान ले ली और लाखों को विस्थापित कर दिया। दमिश्क और कुर्द नेतृत्व के बीच प्रशासनिक व सैन्य एकीकरण को लेकर चल रही बातचीत की रफ्तार भी काफी धीमी है। ऐसे में वैश्विक विश्लेषक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि क्या यह ऐतिहासिक फरमान कागजी घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीन पर स्थायी शांति और वास्तविक बदलाव ला पाएगा।
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