ट्रंप के युद्ध-रोधी दावे: टैरिफ नीति का बचाव

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ट्रंप के युद्ध-रोधी दावे: टैरिफ नीति का बचाव
भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने का फिर एक बार क्रेडिट लेते दिखे डोनाल्ड ट्रंप, Tariff थोपने के फैसले को ऐसे किया जस्टिफाई

ट्रंप का दावा: सात बड़े संघर्षों पर मेरा हाथ? भारत-पाक तनाव कम करने में भी मेरी भूमिका!

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया भर में चल रहे सात बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को खत्म कराने में अपनी भूमिका का परचम लहराया है। इतना ही नहीं, उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच के सीमाई तनाव को कम करने का श्रेय भी खुद को दिया है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है, और इस मामले का समाधान केवल द्विपक्षीय वार्ता से ही संभव है।

एक कार्यक्रम के दौरान, व्यापारिक टैरिफ पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने अपने अंदाज़ में कहा, “अगर मेरे पास टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं होता, तो इस समय दुनिया में कम से कम चार बड़े युद्ध चल रहे होते।” उन्होंने आगे दावा किया कि उन्हीं की नीतियों के चलते इस साल की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के बीच एक युद्धविराम समझौता हुआ, जिसने दोनों परमाणु शक्तियों के बीच के तनाव को कम करने में मदद की।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने न केवल देश को आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि अमेरिका को एक “शांतिदूत देश” के रूप में भी स्थापित किया है। उनके मुताबिक, इन टैरिफ से अमेरिका को सैकड़ों अरब डॉलर की अतिरिक्त कमाई हुई है, जिसने देश की स्थिति को और भी मजबूती प्रदान की है।

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस तरह का दावा किया हो। इससे पहले, 10 मई 2025 को, उन्होंने सोशल मीडिया पर यह घोषणा करते हुए सनसनी फैला दी थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच रात भर चली बातचीत के बाद दोनों देशों ने पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताई है। तब से, ट्रंप कई बार यह दोहराते रहे हैं कि उन्होंने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच तनाव कम कराने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हालांकि, भारत का रुख हमेशा से ही स्पष्ट रहा है कि पाकिस्तान से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं होगा। भारत का दृढ़ विश्वास है कि दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत ही विवादों को सुलझाने का सबसे कारगर रास्ता है। वहीं, ट्रंप के इन बयानों को कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ केवल एक प्रचार अभियान और घरेलू राजनीति से जुड़ा कदम मान रहे हैं, जिसके जरिए वह अपनी विदेश नीति की सफलता का ढिंढोरा पीट रहे हैं।


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