ट्रंप की गलबहियाँ और भारत की आत्मनिर्भरता: एक नया अध्याय
हाल ही में, एक तस्वीर सामने आई जिसने भू-राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। इस तस्वीर में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ऑपरेशल सिंदूर में भारतीय सेना से मात खाकर लौटे फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ आत्मीयता से खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य, कुछ लोगों की नजर में, अमेरिका के भारत के साथ बदलते व्यापारिक संबंधों का परिचायक है, जो अब सिर्फ एक ट्रेडिंग पार्टनर न रहकर एक प्रमुख प्रतिस्पर्धी के रूप में उभरा है। ऐसा लगता है कि अमेरिका अब भारत की बढ़ती शक्ति से भयभीत है।
कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान को अपने सामने जिस अंदाज में देखते थे, वैसा ही रुख भारत से भी उम्मीद कर रहे थे। लेकिन, अपने वैश्विक मंच पर व्यस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के फोन कॉल का जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा। इस कथित अनदेखी से क्षुब्ध होकर, ट्रंप ने पाकिस्तान के नेताओं के साथ अपनी यह मुलाकात आयोजित की, जिसका उद्देश्य शायद पीएम मोदी को चिढ़ाना था। लेकिन, यह तो बस शुरुआत थी। ट्रंप ने न सिर्फ पीएम मोदी को, बल्कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी सार्वजनिक रूप से निशाना बनाना शुरू कर दिया।
यूक्रेन युद्ध और बदलती वैश्विक कूटनीति
अचानक, ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की प्रशंसा में भी कसीदे पढ़ने शुरू कर दिए। यह सब तब हो रहा था जब ट्रंप, पुतिन पर निशाना साध रहे थे और शहबाज-मुनीर के साथ गर्मजोशी से मिल रहे थे। लेकिन, ठीक इसी समय, पीएम मोदी ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे खेल का रुख पलट दिया।
भारत का रूस के साथ मजबूत होता रिश्ता
पीएम मोदी ने रूस और रूसी हथियारों पर एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने रूस के उप प्रधानमंत्री दिमित्री पत्रुशेव से मुलाकात की, जिसमें कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और आपसी हित के अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा हुई। इसके बाद, पीएम मोदी ने ऐतिहासिक बयान दिया कि "रूस हमारा एक समय-परीक्षित (Time Tested) भागीदार है।" यह बयान यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के दौरान आया, जहाँ पहले उन्होंने अमेरिकी टैरिफ का जवाब देते हुए कहा कि विकास के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है। इसके साथ ही, उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया।
ट्रंप का गुस्सा और भारत पर टैरिफ की धमकी
माना जा रहा है कि पुतिन द्वारा ट्रंप को लगातार नजरअंदाज करने से भी ट्रंप काफी खीझे हुए हैं। उन्होंने खुलेआम कहा कि वे पुतिन से नाराज हैं और पुतिन उनके सामने "कागजी शेर" हैं, जिन्हें वे हरा देंगे। ट्रंप का यह भी मानना है कि रूस की हार तभी संभव है जब भारत को "सजा" दी जाए, क्योंकि रूस और भारत गहरे दोस्त हैं। इस बयान के तुरंत बाद, ट्रंप ने 1 अक्टूबर से ब्रांडेड या पेटेंट दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की, सिवाय उन कंपनियों के जो अमेरिका में अपने दवा निर्माण संयंत्र लगा रही हैं। यह धमकी सीधे तौर पर भारत के लिए थी, क्योंकि भारत अमेरिका को 30% दवाएं निर्यात करता है। अनुमान है कि अमेरिकी डॉक्टर जितनी दवाएं लिखते हैं, उनमें से लगभग 40% भारतीय कंपनियों द्वारा बनाई जाती हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर भारत का बढ़ता कदम
पुतिन को कोसने और भारत पर टैरिफ लगाने के बाद भी जब ट्रंप का मन नहीं भरा, तो उन्होंने जानबूझकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ अपनी यह आत्मीयता प्रदर्शित की। पीएम मोदी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ पाकिस्तान अमेरिका से हथियारों की भीख मांग रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत हथियारों के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनका लक्ष्य "मेड इन इंडिया" की छाप हर हथियार के पुर्जे पर लगाना है, और इस मिशन में रूस भारत की मदद कर रहा है। यह बयान एक नई भू-राजनीतिक तस्वीर पेश करता है, जहाँ भारत अपनी शर्तों पर वैश्विक मंच पर अपनी जगह बना रहा है।
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