घेरे में फंसे यूक्रेनी सैनिकों की दास्तान: पुतिन के खुलासे का इंतजार

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पुतिन ने घेरे गए यूक्रेनी बलों तक विदेशी मीडिया की पहुंच सुनिश्चित करने का आदेश दिया

पुतिन का अनोखा कदम: यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में विदेशी मीडिया का स्वागत, क्या छिपे हैं राज?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए, देश के रक्षा मंत्रालय को आदेश दिया है कि वे तीन प्रमुख क्षेत्रों में घिरे यूक्रेनी सैनिकों की जमीनी हकीकत को दुनिया के सामने लाने के लिए विदेशी मीडिया को विशेष पहुंच प्रदान करें। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब रूस लगातार यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना कर रहा है।

“तास” और “आरआईए नोवोस्ती” के हवाले से रक्षा मंत्रालय का बयान:

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि देश के सर्वोच्च कमांडर-इन-चीफ, यानी राष्ट्रपति पुतिन, ने निर्देश दिया है कि क्रास्नोअर्मेस्क, दिमित्रोव और कुप्यांस्क जैसे उन क्षेत्रों में, जहाँ यूक्रेनी सैनिक घिरे हुए हैं, विदेशी पत्रकारों को निर्बाध पहुँच दी जाए। यह पहल स्पष्ट रूप से यूक्रेन युद्ध की तस्वीरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करने के रूसी प्रयास का हिस्सा है।

पांच-छह घंटे का युद्धविराम और सुरक्षित गलियारा:

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो रूसी सेना इन क्षेत्रों में पांच से छह घंटे के लिए शत्रुता समाप्त करने के लिए भी तैयार है। इस दौरान, यूक्रेनी और अन्य विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों के समूहों को सुरक्षित रूप से प्रवेश और निकास के लिए एक विशेष गलियारा प्रदान किया जाएगा। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में पत्रकारों और रूसी सैन्यकर्मियों, दोनों की सुरक्षा की गारंटी सर्वोपरि रखी जाएगी।

10,000 से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों को घेरने का दावा:

यह खबर ऐसे समय में आई है जब चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, जनरल वालेरी गेरासिमोव, ने रविवार को राष्ट्रपति पुतिन को अपनी ब्रीफिंग में यह दावा किया था कि रूसी सैनिकों ने 10,000 से अधिक यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया है और उन्हें प्रभावी ढंग से रोक दिया है। अब, इस दावे की सत्यता की जांच के लिए विदेशी मीडिया को मौका दिया जाएगा।

ड्रोन से आत्मसमर्पण का संदेश:

सरकार के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों पर जो फुटेज प्रसारित किए गए हैं, उनमें रूसी ड्रोन यूक्रेनी सैनिकों पर पर्चे गिराते हुए दिखाए गए हैं। इन पर्चों में यूक्रेनी सैनिकों से अनावश्यक रक्तपात से बचने और आत्मसमर्पण करने की अपील की गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विदेशी मीडिया को इन दावों की पुष्टि करने का अवसर मिल पाता है या नहीं।

यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गहन रुचि का विषय है, क्योंकि यह पहली बार है जब रूस ने सीधे तौर पर यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में विदेशी पत्रकारों को इस तरह की प्रत्यक्ष पहुंच देने का प्रस्ताव दिया है। क्या यह पारदर्शी होने का प्रयास है या एक सोची-समझी रणनीति, यह तो समय ही बताएगा।


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