कतर पर गरजा अमेरिका का डंडा, अब हुआ हमला तो खैर नहीं!
मध्य पूर्व के तनाव को शांत करने के मिशन पर निकले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दांव खेला है, जिसने सबको चौंका दिया है। व्हाइट हाउस से जारी एक गरमागरम एग्जिक्यूटिव ऑर्डर में साफ-साफ कहा गया है कि अगर किसी ने कतर पर बंदूक तानी, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। इसे “संयुक्त राज्य अमेरिका की शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा” माना जाएगा और फिर अमेरिका का एक्शन देखने लायक होगा।
यह आदेश ऐसे वक्त आया है, जब तीन हफ्ते पहले ही हमास नेताओं को निशाना बनाकर इजरायल ने दोहा में अपना वार खाली था। उस वार पर ट्रंप ने अपना एतराज जताया था और कतर ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। कतर की नाराजगी को भांपते हुए ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को मनाने में कामयाब रहे कि वे अपने कतरी समकक्ष, प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी से माफी मांगे। आखिरकार, फोन पर हुई बातचीत के बाद नेतन्याहू ने माफी का पैगाम भेज ही दिया।
सोमवार को जारी यह फरमान, गाजा में युद्ध को विराम देने की ट्रंप की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। दोहा ने इस योजना की खूब सराहना की है, वहीं नेतन्याहू ने भी इसे स्वीकार करने का संकेत दिया है। यह आदेश स्पष्ट रूप से यह संदेश देता है कि भविष्य में कतर पर होने वाले किसी भी सशस्त्र हमले का अमेरिका कड़ा जवाब देगा।
ऑर्डर में स्पष्ट रूप से लिखा है: “ऐसे किसी भी हमले की स्थिति में, अमेरिका, संयुक्त राज्य अमेरिका और कतर राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी वैध और उचित कदम उठाएगा – इसमें कूटनीतिक, आर्थिक और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई भी शामिल होगी, ताकि शांति और स्थिरता बहाल की जा सके।”
आपको बता दें कि कतर, मध्य पूर्व में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है। इसी साल की शुरुआत में, ईरान ने भी कतर पर हमला किया था। इसके अलावा, कतर ने गाजा में युद्धविराम कराने में मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई है। इसीलिए, कार्यकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि “विदेश मंत्री, कतर के व्यापक राजनयिक और मध्यस्थता अनुभव को देखते हुए, संघर्ष समाधान और मध्यस्थता के लिए जब भी जरूरत होगी, कतर के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।”
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