पाकिस्तान की युवा शक्ति का खाली हाथ: एक गंभीर संकट की आहट
पाकिस्तान की डिजिटल जनगणना ने देश के सामने एक चिंताजनक सच्चाई उजागर की है: देश की एक-तिहाई युवा आबादी, यानी 15 से 35 वर्ष की आयु के लाखों युवा, बेरोजगारी के अंधकार में जी रहे हैं। कुल 24 करोड़ 15 लाख की आबादी वाले इस राष्ट्र में, लगभग 1 करोड़ 87 लाख युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, यह आंकड़ा एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट की ओर इशारा करता है।
‘पाकिस्तान ऑब्जर्वर’ की एक मार्मिक रिपोर्ट इस हकीकत को सामने लाती है, जो देश के लाचार नागरिकों और बेपरवाह शासकों के बीच की खाई को दर्शाती है। रिपोर्ट में सिस्टम की खामियों को उजागर किया गया है, खासकर उन लोगों की उपेक्षा पर जोर दिया गया है जो ‘NEET’ (Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में आते हैं। यानी, वे युवा जो न तो शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, न रोजगार में हैं, और न ही किसी प्रकार के प्रशिक्षण से जुड़े हैं।
यह समस्या केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा है। 15 से 35 वर्ष के आयु वर्ग के एक-तिहाई पाकिस्तानी सीधे तौर पर बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। ‘वर्किंग एज पापुलेशन’ यानी काम करने की उम्र वाली आबादी, जो कि 17.17 करोड़ है, में से भी 11 फीसदी के पास कोई नौकरी नहीं है।
‘NEET’ समूह में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने पूरी तरह से काम ढूंढना छोड़ दिया है, जो बिना वेतन वाले या असंगठित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, या फिर ऐसे पारिवारिक व्यवसायों में उलझे हैं जिनकी उत्पादन क्षमता नगण्य है।
रिपोर्ट पाकिस्तानी महिलाओं की दयनीय स्थिति पर भी प्रकाश डालती है। देश में महिला श्रम बल भागीदारी दर अत्यंत चिंताजनक रूप से कम है। ‘NEET’ समस्या के साथ-साथ, देश की आधी आबादी की श्रम बाजार में कम भागीदारी ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है।
यह घटती दरें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि श्रम शक्ति का कौशल मौजूदा अर्थव्यवस्था की मांगों के अनुरूप नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप संरचनात्मक बेरोजगारी बढ़ रही है। संरचनात्मक बेरोजगारी वह स्थिति है जहाँ नियोक्ता और नौकरी चाहने वाले व्यक्तियों के कौशल का मिलान नहीं हो पाता।
2025 में बेरोजगारी दर बढ़कर लगभग 8 प्रतिशत होने का अनुमान है। कुल श्रम बल 8 करोड़ 51 लाख 80 हजार होगा, जिसमें 68 लाख 10 हजार बेरोजगार होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार दर लगभग 52.2 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि काम करने की उम्र वाली लगभग आधी आबादी या तो बेरोजगार है या अल्प-रोजगार (योग्यता के अनुसार नौकरी न मिलना) का सामना कर रही है।
महंगाई, विदेशी मुद्रा संकट, और 2022 तथा हाल ही में 2025 की विनाशकारी बाढ़ ने छोटे व्यवसायों और स्थानीय रोजगार बाजारों को बुरी तरह तबाह कर दिया है। विश्व बैंक के ‘आपदा-पश्चात आवश्यकता आकलन’ (Post-Disaster Needs Assessment) ने अरबों डॉलर के नुकसान और लाखों लोगों के दोबारा गरीबी में धकेले जाने की गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट समझदारी से नीति निर्माण की सलाह देती है और आगाह करती है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट पाकिस्तान के युवाओं और देश को लंबे समय तक आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।
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