शांति वार्ता में महिलाओं की अनुपस्थिति: 25 साल पुरानी सच्चाई

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शांति वार्ता में महिलाओं की अनुपस्थिति: 25 साल पुरानी सच्चाई
ऐतिहासिक प्रस्ताव के 25 साल बाद भी शांति वार्ताओं से महिलाएं अक्सर अनुपस्थित: संरा प्रमुख

शांति की मेज से महिलाएं अभी भी दूर: संयुक्त राष्ट्र में चिंता की लहर

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र के गलियारों में मंगलवार को एक बार फिर महिलाओं की अनुपस्थिति शांति वार्ताओं में खलने लगी। यह चिंता तब और गहरी हो गई जब शांति प्रयासों में महिलाओं की समान भागीदारी को बढ़ावा देने वाले संयुक्त राष्ट्र के ऐतिहासिक प्रस्ताव को 25 साल पूरे हो गए। संयुक्त राष्ट्र महिला एजेंसी की प्रमुख ने भी महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती यौन हिंसा पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया कि 67.6 करोड़ महिलाएं घातक संघर्षों के 50 किलोमीटर के दायरे में रहती हैं, जो 1990 के दशक के बाद से सबसे अधिक है।

रक्षा खर्च में वृद्धि, संघर्षों में तेज़ी, और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सुरक्षा परिषद की एक विशेष बैठक में इस गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “पूरी दुनिया में हम सैन्य खर्च में परेशान करने वाले रुझान, अधिक सशस्त्र संघर्ष और महिलाओं तथा लड़कियों के खिलाफ और भी अधिक चौंकाने वाली क्रूरता देख रहे हैं।”

कुछ प्रगति, पर नींव कमजोर

गुतारेस ने स्वीकार किया कि 31 अक्टूबर, 2000 को प्रस्ताव को अपनाने के बाद कुछ सकारात्मक बदलाव आए हैं। संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के रूप में वर्दीधारी महिलाओं की संख्या दोगुनी हुई है, और महिलाओं ने स्थानीय मध्यस्थता में नेतृत्व संभाला है। लैंगिक-आधारित हिंसा पीड़ितों के लिए न्याय की राह प्रशस्त हुई है, और महिला संगठन संघर्षों से उबरने व सुलह को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, गुतारेस ने चेतावनी दी, “ये उपलब्धियां नाजुक हैं और यह बहुत चिंताजनक है कि वे विपरीत दिशा में जा रही हैं।”

प्रतिबद्धताएँ सिर्फ बातों तक सीमित?

महासचिव ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे मंचों पर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन शांति वार्ताओं में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने और संघर्षों में महिलाओं तथा लड़कियों को बलात्कार एवं यौन दुर्व्यवहार से बचाने के प्रस्ताव की मांग को पूरा करने में पूरी तरह से विफल हो जाते हैं।

महिलाओं के अधिकारों के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता और जवाबदेही की मांग

गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे संघर्षों में फंसी महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बढ़ाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रतिबद्धता को नए वित्त प्रदान करके, शांति वार्ताओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करके, यौन हिंसा के लिए जवाबदेही तय करके और उनकी सुरक्षा तथा आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करके ही पूरा किया जा सकता है।


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