बीजिंग का ‘रेड ट्रैप’: एलन मस्क को खाना परोसने वाली वेटर निकली चीनी सेना की खतरनाक कमांडर!
14 मई 2026, बीजिंग: चीन में आयोजित एक राजकीय भोज की टेबल पर दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क बैठे थे। मस्क अपने चिर-परिचित अंदाज में कभी अजीबोगरीब चेहरे बना रहे थे, तो कभी मजाकिया रिएक्शन दे रहे थे। उस वक्त यह वीडियो पूरी दुनिया में हंसी-मजाक के लिए वायरल हुआ था, लेकिन इस वीडियो के पीछे एक ऐसा ‘डार्क सीक्रेट’ छिपा था जिसने अब अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
मस्क की खातिरदारी में लाल कपड़ों में तैनात जिस महिला वेटर पर सबकी निगाहें थीं, उसे लेकर अब एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दावा किया जा रहा है कि वह कोई साधारण वेटर नहीं, बल्कि मस्क की जासूसी के लिए तैनात की गई चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की एक जांबाज कमांडर थी।
कौन है ये ‘रहस्यमयी वेटर’?
इस जासूसी कांड का पर्दाफाश चीनी मूल की मानवाधिकार कार्यकर्ता और लेखिका जेनिफर जेंग ने किया है। जेंग के मुताबिक, मस्क को खाना परोसने वाली यह महिला चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य और PLA की बटालियन कमांडर ‘चेंग चेंग’ है। जेंग ने सबूत के तौर पर चेंग चेंग के सैन्य वर्दी वाले वीडियो और तस्वीरें भी साझा की हैं, जिसमें वह मेडल पहने और परेड का नेतृत्व करते हुए दिखाई दे रही हैं।
जासूसी का लंबा अनुभव
चेंग चेंग का प्रोफाइल किसी मंझी हुई जासूस जैसा है। 1986 में जन्मी चेंग 2004 में महज 18 साल की उम्र में सेना में शामिल हुई थीं। उन्होंने कम्युनिकेशन सोल्जर से अपना सफर शुरू किया और बाद में नर्सिंग की पढ़ाई की। 2012 में उन्हें ‘PLA ऑनर गार्ड सेरेमोनियल ब्रिगेड’ में जगह मिली और 2014 से वह महिला यूनिट की कमान संभाल रही हैं। इतना ही नहीं, वह दो बार ‘नेशनल पीपल्स कांग्रेस’ की सदस्य भी चुनी जा चुकी हैं। आरोप है कि उन्होंने इससे पहले ट्रंप के बीजिंग दौरे के समय भी अमेरिकी डेलीगेशन की जासूसी की थी।
चीन की शातिर चाल और अमेरिका का डर
हॉल में मौजूद वीडियो फुटेज में चेंग चेंग को एक साथी से संदिग्ध बातचीत करते हुए भी देखा गया है। जानकार इसे चीन की ‘हनी ट्रैप’ या ‘प्रॉक्सिमिटी स्पाइंग’ की रणनीति मान रहे हैं, जहां बेहद अनुभवी और प्रशिक्षित सैन्य अधिकारियों को वेटर के भेष में तैनात किया जाता है ताकि वे अति-विशिष्ट मेहमानों की बातों और गतिविधियों पर नजर रख सकें।
चीन की इस मंशा को भांपते हुए ही 15 मई को जब अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल वापस लौट रहा था, तो सुरक्षा एजेंसियों ने सख्त निर्देश दिए। नतीजतन, एयरफोर्स वन में सवार होने से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने चीन की ओर से मिले सभी गिफ्ट्स, बैज और फोन डस्टबिन में फेंक दिए। उन्हें डर था कि इन सामानों में साइबर जासूसी या इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के उपकरण हो सकते हैं।
हालांकि चीन ने इन दावों पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन इस खुलासे ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बीजिंग की मेहमाननवाजी के पीछे जासूसी का कितना बड़ा जाल बिछा होता है।
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