कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच चमक फीकी या निवेश का नया दौर? विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की मंगलवार को जारी ताजा रिपोर्ट ने सोने के बाजार को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। ‘तीसरी तिमाही 2026 स्वर्ण मांग रुझान रिपोर्ट’ के अनुसार, अनिश्चितता के माहौल में सितंबर तिमाही के दौरान सोने की वैश्विक मांग सालाना आधार पर एक प्रतिशत घटकर 1,369 टन पर सिमट गई। हालांकि, इस दौरान सोने की औसत कीमत आसमान छूते हुए 4,262 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस (एक ट्रॉय औंस = 31.103 ग्राम) पर पहुंच गई, जिससे कुल मांग का मूल्य सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगाकर 188 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
रिकॉर्ड तोड़ कीमतों का सीधा असर आम खरीदारों की जेब पर पड़ा है। आभूषणों की मांग पर इसका गहरा प्रतिकूल असर देखा गया, जो सालाना आधार पर 17 प्रतिशत लुढ़ककर मात्र 313 टन रह गई। हैरानी की बात यह है कि यह किसी भी तीसरी तिमाही का अब तक का सबसे कमजोर स्तर है, जो महामारी से बुरी तरह प्रभावित 2020 की तीसरी तिमाही (331 टन) के आंकड़े से भी नीचे चला गया है।
महंगाई और ऊंची कीमतों के चलते ग्राहकों का रुझान अब भारी-भरकम गहनों से हटकर हल्के और कम कैरेट वाले आभूषणों की ओर हो गया है, हालांकि वैश्विक स्तर पर आभूषणों की मांग का कुल मूल्य मामूली रूप से बढ़कर 43 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया। डब्ल्यूजीसी के भारत में क्षेत्रीय मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सचिन जैन ने पीटीआई-भाषा को बताया कि क्षेत्रीय मोर्चे पर चीन में आभूषणों की मांग में लगभग 22 प्रतिशत और भारत में करीब 19.5 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इसके अलावा अमेरिका, पश्चिम एशिया और सऊदी अरब जैसे प्रमुख बाजारों में भी मांग बुरी तरह प्रभावित हुई है।
राहत की बात यह रही कि चीन और भारत में त्योहारी व मौसमी सुधार तथा कीमतों में हल्की नरमी के चलते तिमाही-दर-तिमाही आधार पर मांग में 12 प्रतिशत का सकारात्मक सुधार भी देखने को मिला। दूसरी ओर, भौतिक सोने से समर्थित गोल्ड ईटीएफ (ETF) में तीसरी तिमाही के दौरान जोरदार वापसी हुई और इसमें 211 टन की भारी वृद्धि दर्ज की गई। यह पिछली तिमाही में हुई निकासी के ठीक विपरीत एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव है।
इस शानदार तेजी में यूरोप में सूचीबद्ध कोषों ने सबसे आगे रहकर 92 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। यह 2022 की पहली तिमाही के बाद से सबसे मजबूत तिमाही छलांग है, क्योंकि जून की बिकवाली के बाद यूरोपीय निवेशकों ने एक बार फिर सोने पर अपना भरोसा जताया है। जैन ने इस ट्रेंड पर रोशनी डालते हुए कहा, ‘‘ऐतिहासिक रूप से जब भी सोने की कीमत में गिरावट आती है, तो ईटीएफ से आमतौर पर बिकवाली या निकासी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार का परिदृश्य बेहद दिलचस्प रहा क्योंकि इस तिमाही में भारी निवेश आया, जिसने बाजार को बेहद मजबूत आधार दिया।’’
हालांकि, व्यक्तिगत निवेशकों ने सोने की छड़ और सिक्कों से थोड़ी दूरी बनाए रखी, क्योंकि कीमतों की कोई स्पष्ट दिशा तय नहीं थी। यही वजह है कि इनकी मांग सालाना आधार पर 19 प्रतिशत घटकर 268 टन पर आ गई। इसके उलट, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थानों ने जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान अपने स्वर्ण भंडार को और मजबूत किया और शुद्ध रूप से 321 टन सोना जोड़ा।
यह आंकड़ा सालाना आधार पर 42 प्रतिशत अधिक है और 2024 की चौथी तिमाही के बाद से किसी भी तिमाही में सबसे बड़ी खरीदारी है। अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाना और वैश्विक आर्थिक जोखिमों से निपटना इस भारी मांग के सबसे बड़े कारण रहे। इस मजबूत रुझान को मुख्य रूप से चीन, पोलैंड और चेक गणराज्य के केंद्रीय बैंकों की ओर से जबरदस्त समर्थन मिला।
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