द बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर RBI का शिकंजा: ₹10,000 की निकासी सीमा, जमाकर्ताओं के लिए नई चिंताएं
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित द बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसने जमाकर्ताओं के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। बैंक की गंभीर नकदी की कमी और परिचालन में पाई गई खामियों को देखते हुए, RBI ने तत्काल प्रभाव से कुछ सख्त नियम लागू किए हैं।
वसूली पर ₹10,000 की सीमा
इन प्रतिबंधों के तहत, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अब कोई भी जमाकर्ता अपने किसी भी मान्य खाते (बचत, चालू या अन्य) से कुल शेष राशि में से केवल ₹10,000 तक ही निकाल सकेगा। यह सीमा बैंक के प्रत्येक जमाकर्ता पर लागू होगी। यदि किसी जमाकर्ता पर बैंक का कोई ऋण बकाया है, तो बैंक नियमों के अनुसार उस जमा राशि से उसे समायोजित करने का अधिकार रखता है।
RBI के अन्य कड़े निर्देश
- ऋण पर रोक: बैंक, RBI की लिखित पूर्व अनुमति के बिना, कोई भी नया ऋण नहीं दे सकेगा, न ही मौजूदा ऋणों का नवीनीकरण कर सकेगा, और न ही कोई नई देनदारियां स्वीकार कर सकेगा।
- नई जमा राशि की अस्वीकृति: बैंक अब किसी भी नई जमा राशि को स्वीकार नहीं कर सकेगा।
- अनिवार्य खर्चों की छूट: हालांकि, बैंक अपने नियमित और अनिवार्य खर्चों, जैसे वेतन, किराया, बिजली बिल आदि का भुगतान जारी रख सकेगा।
- अवधि और समीक्षा: ये निर्देश 8 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुए हैं और प्रारंभिक तौर पर 6 महीने की अवधि के लिए लागू रहेंगे। इसके बाद, RBI स्थिति की समीक्षा करेगा और तदनुसार निर्णय लेगा।
जमा बीमा का आश्वासन
यह भी महत्वपूर्ण है कि जमाकर्ताओं के लिए ₹5 लाख तक का जमा बीमा DICGC के तहत उपलब्ध है, बशर्ते वे इसके पात्र हों। यह उन जमाकर्ताओं के लिए थोड़ी राहत प्रदान कर सकता है जिन्हें अधिक राशि की आवश्यकता है।
लाइसेंस रद्द नहीं, बल्कि सुधार का अवसर
RBI ने स्पष्ट किया है कि ये प्रतिबंध बैंक का लाइसेंस रद्द करने की ओर इशारा नहीं करते। बल्कि, ये एक सुधारात्मक उपाय हैं ताकि बैंक अपने वित्तीय स्वास्थ्य को सुदृढ़ कर सके। RBI स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा और आवश्यकतानुसार इन निर्देशों में बदलाव या अन्य उचित कदम उठा सकता है।
कार्रवाई का कारण: जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा
RBI की यह कार्रवाई बैंक द्वारा समय पर अपनी परिचालन संबंधी खामियों और नियमों के अनुपालन में की गई उपेक्षा के कारण हुई है। RBI का मानना है कि बैंक ने जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिसके परिणामस्वरूप यह प्रतिबंधात्मक कार्रवाई आवश्यक हो गई। इसका मुख्य उद्देश्य बैंक में नकदी संकट को नियंत्रित करना और जमाकर्ताओं का विश्वास बनाए रखना है।
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