वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक धाक: निर्मला सीतारमण का सशक्त उद्घोष
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बादल घिरे होने के बावजूद, भारत अपनी मजबूत वृहद-आर्थिक नींव के बल पर अभूतपूर्व जुझारूपन का प्रदर्शन करने में सफल रहा है। यह बात केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के 91वें स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में कही।
वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि बीते एक साल में वैश्विक परिदृश्य में अस्थिरता की लहरें महसूस की जा रही हैं, जिसका प्रभाव विभिन्न राष्ट्रों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। "लेकिन इन सबके बीच, भारत की अद्वितीय मजबूती उभर कर सामने आती है। हमारी ठोस वृहद-आर्थिक बुनियाद, ऊर्जावान युवा जनसंख्या, और घरेलू मांग पर अधिक निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है," सीतारमण ने जोर देकर कहा।
यह आर्थिक शक्ति चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही, यानी अप्रैल-जून अवधि में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई, जहाँ देश ने 7.8 प्रतिशत की प्रभावशाली जीडीपी वृद्धि दर हासिल की। वित्त मंत्री ने इसे महज़ एक संयोग मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे सक्रिय राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों, भौतिक एवं डिजिटल अवसंरचना के विशाल निर्माण, उत्कृष्ट शासन, और बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।
इस विशेष अवसर पर, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को अधिक ऋण प्रदान करने की दिशा में विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने बैंकों से शिक्षा ऋण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही, इस पर जोर देते हुए कि शिक्षा ऋण का कोई भी आवेदन अस्वीकृत न हो।
नागराजू ने बैंकों से कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी सतर्कता बरतने की सलाह दी कि कर्ज की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान रखा जाए।
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