देश के कोने-कोने तक पहुँचेंगे रेल के पहिये: चार बड़ी परियोजनाओं को मिली हरी झंडी, 2030 तक होंगे तैयार
नई दिल्ली: रेल अवसंरचना को मजबूती देने और देश भर में आवागमन को सुगम बनाने की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ में चार महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर भारतीय रेलवे के लगभग 894 किलोमीटर के नेटवर्क का विस्तार होगा, जो 2030-31 तक पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है।
चार राज्यों में बिछेगा रेल का नया जाल:
सीसीईए की विज्ञप्ति के अनुसार, स्वीकृत परियोजनाओं में शामिल हैं:
- महाराष्ट्र: वर्धा-भुसावल खंड पर तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण (314 किमी)।
- महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़: गोंदिया-डोंगरगढ़ खंड पर चौथी लाइन का विस्तार (84 किमी)।
- गुजरात और मध्य प्रदेश: वडोदरा-रतलाम खंड पर तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण (259 किमी)।
- मध्य प्रदेश: इटारसी-भोपाल-बीना खंड पर चौथी लाइन बिछाई जाएगी (237 किमी)।
लाखों लोगों के जीवन में आएगा बदलाव:
ये परियोजनाएं कुल मिलाकर 18 जिलों में फैली होंगी और 85.84 लाख से अधिक की संयुक्त आबादी वाले लगभग 3,633 गांवों को बेहतर रेल संपर्क से जोड़ेगी। विशेष रूप से, मध्य प्रदेश का विदिशा और छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव, जो आकांक्षी जिले हैं, भी इस विस्तार से लाभान्वित होंगे।
क्षमता वृद्धि और परिचालन दक्षता पर जोर:
इन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य रेल लाइनों की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करना, भीड़भाड़ को कम करना और भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार लाना है। ये परियोजनाएं “आत्मनिर्भर भारत” के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं और इनसे सेवा प्रदान किए जाने वाले क्षेत्रों में आर्थिक विकास और रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की प्रबल उम्मीद है।
प्रधानमंत्री गति शक्ति का सफल क्रियान्वयन:
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत नियोजित, इन परियोजनाओं का उद्देश्य एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करना है।
पर्यटन और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को मिलेगी गति:
सुधरी हुई रेल लाइनें यात्रियों और माल ढुलाई दोनों के लिए निर्बाध परिवहन प्रदान करेंगी। इससे सांची, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, भीमबेटका रॉक शेल्टर, हज़ारा फॉल्स और नवेगाँव राष्ट्रीय उद्यान जैसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों तक पहुँच और भी आसान हो जाएगी। इतना ही नहीं, ये मार्ग कोयला, सीमेंट, कंटेनर, फ्लाई ऐश, खाद्यान्न और इस्पात जैसे आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अनुमान है कि विस्तारित क्षमता से प्रति वर्ष 78 मिलियन टन (एमटीपीए) अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी।
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