क्रूड का प्रहार! घाटा पाटने के लिए OMCs का ‘मास्टर स्ट्रोक’, अब रिफाइनरियों के भुगतान पर कैंची चलाने की तैयारी।

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
कच्चे तेल की मार! घाटा कम करने के लिए OMCs का बड़ा दांव, रिफाइनरियों को आयात दरों से कम भुगतान की तैयारी

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना भारतीय पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव न होने से ये कंपनियां भारी वित्तीय दबाव में हैं। अब इस घाटे की भरपाई के लिए ओएमसी रिफाइनरी हस्तांतरण शुल्क (RTP) के भुगतान में कटौती करने की नई रणनीति पर विचार कर रही हैं।

इस कदम का सबसे ज्यादा असर एमआरपीएल, सीपीसीएल और एचएमएल जैसी स्टैंडअलोन रिफाइनरी कंपनियों पर पड़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया संकट से पहले कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर का स्तर लांघ चुकी हैं। इसके बावजूद भारत में ईंधन की खुदरा कीमतें स्थिर हैं, जिससे ओएमसी को अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी का पूरा बोझ खुद सहना पड़ रहा है।

इसे भी पढ़ें: Iran Open Warning | ‘जिंदा हैं तो भी मार डालेंगे’, Benjamin Netanyahu के पीछे पड़ी IRGC! खाड़ी देशों में भारी बमबारी | Iran-Israel War Update

सूत्रों के मुताबिक, ओएमसी अब आरटीपी पर रोक लगाने या उस पर विशेष छूट देने के विकल्प को तौल रही हैं। आरटीपी वह आंतरिक मूल्य है जिस पर रिफाइनरियां अपने मार्केटिंग सेगमेंट को ईंधन बेचती हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य रिफाइनरियों को पेट्रोल और डीजल की आयात-समता लागत से कम भुगतान करना है।

इसे भी पढ़ें: मार्च में बढ़ती गर्मी के बीच दिल्ली में अचानक बारिश क्यों हो रही है? IMD Weather Alert

यदि वैश्विक तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो इस प्रस्तावित बदलाव के कारण रिफाइनरियां कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत का पूरा भार आरटीपी के जरिए आगे नहीं खिसका पाएंगी। उन्हें भी इस आर्थिक बोझ का एक हिस्सा खुद वहन करना होगा। हालांकि, आईओसी (IOC), बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) जैसी एकीकृत कंपनियां अपने रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशन के बीच मुनाफे और घाटे का तालमेल बिठाकर इसे संतुलित कर सकती हैं।

दूसरी तरफ, मैंगलोर रिफाइनरी (MRPL), चेन्नई पेट्रोलियम (CPCL) और एचएमईएल (HMEL) जैसी एकल रिफाइनरियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि खुदरा बाजार में उनकी उपस्थिति सीमित है और वे अपना अधिकांश उत्पाद इन्हीं तीन बड़ी सरकारी कंपनियों को बेचती हैं। ऐसे में उनके मुनाफे (मार्जिन) पर भारी चोट पहुंच सकती है।

सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरटीपी पर यह रोक या छूट निजी रिफाइनरियों पर भी लागू हुई, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियां भी इसकी जद में आएंगी। ये कंपनियां भी अपने उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा सरकारी ओएमसी को ही सप्लाई करती हैं।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version