आरबीआई ने नियमों में किए बड़े फेरबदल: विदेशी बैंकों के ऋण और आभूषण क्षेत्र पर नई गाइडलाइन्स
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में देश में काम कर रहे विदेशी बैंकों की शाखाओं से संबंधित ऋणों के विवेकपूर्ण उपचार को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। इसके साथ ही, आरबीआई ने कई अन्य महत्वपूर्ण नियमों में भी संशोधन किए हैं, जिनका असर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र पर पड़ेगा।
विदेशी बैंकों के ऋणों पर नई निगरानी:
नए दिशानिर्देशों के तहत, विदेशी बैंकों की शाखाएं अपनी समूह संस्थाओं को जो ऋण देंगी, उनके विवेकपूर्ण उपचार पर अब अधिक सख्ती से नजर रखी जाएगी। संशोधित नियमों के अनुसार, बैंकों को अब एकल प्रतिपक्ष (single counterparty), परस्पर संबद्ध प्रतिपक्षों के समूह (groups of connected counterparties) और अर्थव्यवस्था के विशिष्ट क्षेत्रों के प्रति अपने जोखिम के संकेन्द्रण (concentration of risk) को लेकर सुदृढ़ प्रबंधन नीतियां बनानी होंगी। इसके अलावा, बहुत-बड़े उधारकर्ताओं (large borrowers) के प्रति उनके जोखिम से उत्पन्न होने वाले खतरों की निगरानी और समाधान के लिए प्रभावी प्रणालियों का भी विकास करना होगा।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि भले ही बैंकों के पास अपने ‘बहुत-बड़े उधारकर्ता’ को परिभाषित करने के लिए अपने स्वयं के मानदंड हों, लेकिन ऐसे उधारकर्ताओं के ऋण मूल्यांकन में उन्हें बैंकिंग प्रणाली से ली गई समग्र उधारी (overall borrowing from the banking system) को भी ध्यान में रखना अनिवार्य होगा।
आभूषण क्षेत्र के लिए सुव्यवस्थित नियम:
एक अन्य महत्वपूर्ण कदम के रूप में, आरबीआई ने ‘भारतीय रिजर्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक-ऋण सुविधाएं) संशोधन निर्देश 2025’ जारी किए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य घरेलू और निर्यातक आभूषण विक्रेताओं के लिए एक सुव्यवस्थित और सुसंगत नियामक ढांचा सुनिश्चित करना है। इन संशोधनों से व्यापार में सुगमता बढ़ेगी और स्वर्ण धातु ऋणों (gold metal loans) पर एक प्रभावी पर्यवेक्षी प्रबंधन सूचना प्रणाली (supervisory management information system) विकसित करने में मदद मिलेगी।
ऋण सूचना रिपोर्टिंग में भी बदलाव:
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक ने ऋण सूचना ‘रिपोर्टिंग’ प्रक्रिया से संबंधित मौजूदा निर्देशों को संशोधित करने के लिए 10 अन्य संशोधन निर्देश भी जारी किए हैं। ये बदलाव बैंकों और एनबीएफसी (NBFCs) सहित विभिन्न विनियमित संस्थाओं पर लागू होंगे, जिससे ऋणों की रिपोर्टिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और कुशल बनेगी।
ये व्यापक संशोधन देश की वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने, जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में आरबीआई द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।
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