सेबी का बड़ा एक्शन: सिनॉप्टिक्स टेक्नोलॉजीज और प्रवर्तकों पर कारोबार पर रोक, आईपीओ की राशि में हेराफेरी का गंभीर आरोप
पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक अहम फैसला सुनाते हुए सिनॉप्टिक्स टेक्नोलॉजीज और उसके प्रवर्तकों को प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक कि आईपीओ (Initial Public Offering) की राशि में कथित हेराफेरी की जांच पूरी नहीं हो जाती। कंपनी के प्रवर्तकों जतिन शाह, जगमोहन मणिलाल शाह और जानवी जतिन शाह भी इस प्रतिबंध के दायरे में हैं।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी वार्ष्णेय ने अपने आदेश में 15 मई, 2024 के अंतरिम निर्देशों को बरकरार रखा, जो पहले ही जारी किए गए थे। इस वर्ष मई में, सेबी ने सिनॉप्टिक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (एसटीएल) और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ आईपीओ आय की हेराफेरी के गंभीर आरोपों के बाद यह अंतरिम प्रतिबंध लगाया था।
हड़पने की सुनियोजित योजना का खुलासा
सेबी के अंतरिम आदेश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जांच से यह पता चला है कि कंपनी (एसटीएल) और प्रमुख प्रबंधक एफओसीएल (फर्स्ट ओवरसीज कैपिटल लिमिटेड) ने आईपीओ से जुटाई गई धनराशि को हड़पने के लिए एक सुनियोजित योजना बनाई थी।
19 करोड़ रुपये का हेरफेर, 54% राशि गायब
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कंपनी ने ‘निर्गम प्रबंधन शुल्क, बिक्री कमीशन, रजिस्ट्रार शुल्क’ जैसे विभिन्न आईपीओ संबंधित खर्चों के नाम पर लगभग 19 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए। यह राशि कंपनी के दस्तावेजों में बताए गए 80 लाख रुपये से कहीं अधिक है। गौर करने वाली बात यह है कि यह कथित तौर पर हस्तांतरित की गई राशि, सिनॉप्टिक्स द्वारा आईपीओ के जरिए जुटाई गई कुल राशि का लगभग 54 प्रतिशत है।
आदेश के अनुसार, यह राशि 35.08 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों के नए निर्गम के माध्यम से सिनॉप्टिक्स द्वारा जुटाई गई कुल आय का 54 प्रतिशत से अधिक और कुल निर्गम आकार (54.04 करोड़ रुपये) का 35 प्रतिशत है।
एफओसीएल पर भी शिकंजा कसा
सेबी ने एफओसीएल को भी निर्देश दिया है कि वह नियामक के अगले निर्देश तक प्रतिभूति बाजार में मर्चेंट बैंकिंग गतिविधियों से संबंधित कोई भी नया कार्य न करे।
यह अंतरिम आदेश सेबी द्वारा आईपीओ बंद होने के बाद बोली प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली शिकायतें प्राप्त होने पर मामले की गहन जांच के बाद आया है। सेबी की यह कार्रवाई बाजार में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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