कच्चे तेल की चाल से गर्माए बाजार: क्या अगले हफ्ते भी जारी रहेगा सोने-चांदी पर दबाव?
कच्चे तेल की कीमतों में जारी उठापटक के बीच, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी की चमक पर दबाव बना रह सकता है। इस दौरान निवेशकों की निगाहें अमेरिका और ईरान के बीच सुलगते तनाव के साथ-साथ दुनिया भर के महंगाई के अहम आंकड़ों पर टिकी होंगी। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले हफ्ते चीन, अमेरिका, जर्मनी, जापान और भारत से आने वाले महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
इसके साथ ही, निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों और अमेरिका के रोजगार बाजार के आंकड़ों पर भी रहेगा। औद्योगिक धातुओं के लिहाज से चीन के आर्थिक आंकड़े भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। भू-राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिका और ईरान का तनाव बाजार के लिए सबसे बड़ा अनिश्चितता का कारक बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए सैन्य हमलों की बात जरूर कंफर्म की है, लेकिन साथ ही तेहरान के साथ बातचीत में खासी प्रगति होने का दावा भी किया है, जिससे बाजार में असमंजस की स्थिति बरकरार है।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (जिंस एवं मुद्रा शोध) प्रणव मेर का कहना है, ‘‘फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का रुख कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। चीन, अमेरिका, जर्मनी, जापान और भारत के महंगाई आंकड़ों के साथ-साथ निवेशकों की नजरें फेडरल रिजर्व के दिग्गजों के बयानों पर भी रहेंगी।’’ घरेलू मोर्चे पर बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले हफ्ते दिसंबर डिलीवरी वाला सोना वायदा करीब 3,682 रुपये यानी लगभग तीन प्रतिशत की छलांग के साथ 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
वहीं दूसरी ओर, चांदी का वायदा भाव भी 5,655 रुपये यानी 3.15 प्रतिशत की मजबूती के साथ 1.84 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें, तो कॉमेक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले हफ्ते 176 डॉलर यानी 4.5 फीसदी उछलकर 4,074.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। जबकि चांदी 2.6 डॉलर यानी 5.4 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ 51.94 डॉलर प्रति औंस पर जा पहुंची।
प्रणव मेर ने आगे बताया कि शुरुआत में अमेरिका के उम्मीद से बेहतर नॉन-फॉर्म पेरोल (गैर-कृषि रोजगार) आंकड़ों और उपभोक्ता धारणा में सुधार के चलते सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला था। इन मजबूत आंकड़ों की वजह से डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेजी दर्ज की गई थी।
हालांकि, हफ्ते के बीच में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे आने के बाद कीमती धातुओं में जबरदस्त उछाल आया और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन्होंने चार प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की। वहीं, हफ्ते के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को एक बार फिर सोने और चांदी के वायदा अनुबंधों पर मुनाफावसूली या बिकवाली का दबाव हावी हो गया, जिसके चलते ये दोनों चमकीली धातुएं क्रमशः लगभग 4,074 डॉलर और 52 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आकर बंद हुईं।
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