कोलकाता, छह नवंबर। पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने उद्योगों को नई रफ्तार देने के लिए एक बड़ा दांव चला है। इसके तहत अब उद्योगों को जमीन मालिकों से सीधे जमीन खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य की नई निवेश प्रोत्साहन नीति में ‘रणनीतिक और मेगा परियोजना’ का दर्जा पाने के मानदंडों में बड़े बदलाव किए गए हैं। बृहस्पतिवार को जारी नीति दस्तावेज के मुताबिक, जो उद्योग खुद अपनी जमीन खरीदेंगे, उन्हें इस प्रतिष्ठित श्रेणी का दर्जा पाने के लिए अब कम जमीन की आवश्यकता होगी।
अब जो निवेशक स्वतंत्र रूप से 500 एकड़ जमीन खरीदेंगे, वे सीधे तौर पर रणनीतिक और मेगा परियोजना का दर्जा पाने के पात्र बन जाएंगे। वहीं, दूसरी ओर सरकारी एजेंसियों से आवंटित जमीन पर निर्भर रहने वाली परियोजनाओं के लिए यह सीमा अब भी 1,000 एकड़ ही रखी गई है। राज्य सरकार का यह रणनीतिक कदम पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चली आ रही औद्योगिक जमीन की भारी कमी और जमीन अधिग्रहण से जुड़े राजनीतिक संवेदनशीलता के कांटों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
गौरतलब है कि वाम मोर्चा शासन के दौर में सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अनिवार्य भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की आग सुलग दी थी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार किसानों से एक इंच भी जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं करेगी, लेकिन इसके साथ ही वह उद्योगपतियों को जमीन की व्यवस्था करने के लिए पूरी तरह अकेला भी नहीं छोड़ेगी। यह बयान पिछली सरकारों की नीतियों से बिल्कुल अलग रुख को साफ तौर पर दर्शाता है।
राज्य सरकार औद्योगिक जमीन की इस पुरानी कमी से पार पाने के लिए कई अभिनव उपायों पर गंभीरता से विचार कर रही है। इनमें जमीन मालिकों से सीधे जमीन की खरीद, भूमि पूलिंग (जमीन का एकत्रीकरण) और बरसों से इस्तेमाल में न आ रहे औद्योगिक भूखंडों को वापस लेने जैसे कड़े कदम शामिल हैं। नवीन भूमि पूलिंग व्यवस्था के तहत जमीन मालिक स्वेच्छा से नियोजित और आधुनिक विकास के लिए आगे आकर अपनी जमीन दे सकेंगे।
इस प्रक्रिया में जमा की गई कुल जमीन के एक हिस्से का इस्तेमाल सुनियोजित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाएगा, जबकि बदले में विकसित भूखंड जमीन मालिकों को उनके योगदान के सटीक अनुपात में वापस लौटा दिए जाएंगे। इसके अलावा, सरकार जमीन मालिकों से सीधे जमीन खरीदने के लिए भारी-भरकम धन जुटाने के वास्ते हुडको, नाबार्ड, एशियाई विकास बैंक और अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर वित्तीय व्यवस्था करने पर भी विचार कर रही है। एक अन्य कड़े प्रस्ताव के तहत उन कंपनियों से आवंटित औद्योगिक जमीन वापस लेने की योजना है, जिनका उपयोग अभी तक नहीं किया गया है।
इन तमाम कवायदों के बाद खाली कराए गए इन भूखंडों का उपयोग उत्पादक गतिविधियों और नए उद्योगों के लिए किया जाएगा। हालांकि, इस पूरी नई व्यवस्था के तहत औद्योगिक इकाइयों को जमीन हासिल करने के ठीक तीन साल के भीतर उत्पादन शुरू करना अनिवार्य होगा। यदि तय समय-सीमा के भीतर परियोजना शुरू नहीं होती है, तो सरकार बिना किसी देरी के जमीन का आवंटन रद्द करने पर कड़ा विचार करेगी।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
