मुंबई, छह नवंबर — राज्यों का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2026-27 में 10-12 प्रतिशत की छलांग लगाकर करीब 8.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने शुक्रवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में यह उम्मीद जताई है कि केंद्र से मिलने वाली मजबूत सहायता और बेहतर राजकोषीय स्थिति के चलते राज्यों के खर्च करने की क्षमता में यह शानदार इजाफा होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों के कुल बजट में निर्धारित पूंजीगत व्यय का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा खर्च होने की पूरी उम्मीद है, जबकि बीते वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 82 प्रतिशत पर सिमट गया था। पूंजीगत व्यय की यह रफ्तार वित्त वर्ष 2025-26 के 8.6 प्रतिशत के मुकाबले काफी बेहतर रहने वाली है। इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा हाथ ‘पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता’ (SASCI) योजना का है, जिसके तहत आवंटन को 33 प्रतिशत बढ़ाकर सीधे दो लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
खास बात यह है कि वित्त वर्ष 2020-21 में शुरू की गई इस योजना के तहत राज्यों को उनकी सामान्य उधार सीमा के अलावा 50 साल के लिए ब्याज-मुक्त कर्ज मुहैया कराए जाते हैं। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी के मुताबिक, “एसएएससीआई के जरिए मिलने वाली इस अतिरिक्त मदद से राज्यों को बिना अपनी सामान्य उधार सीमा को प्रभावित किए निवेश करने का बेहतरीन मौका मिलता है। इस योजना के तहत मिले फंड का इस्तेमाल अब तक शानदार रहा है, जिससे यह वित्तपोषण सीधे तौर पर धरातल पर पूंजीगत खर्च में तब्दील हो सकेगा।”
इसके अलावा, वस्तु एवं सेवा कर (GST) के मजबूत संग्रह और केंद्र से मिलने वाले करों में हिस्सेदारी के दम पर राज्यों की राजस्व प्राप्तियों की वृद्धि दर, उनके राजस्व खर्च की तुलना में करीब 0.75 प्रतिशत अधिक रहने की उम्मीद है।
इससे राज्यों का कुल राजस्व घाटा काफी हद तक काबू में और स्थिर बना रहेगा। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि शहरी बुनियादी ढांचे—खास तौर पर जलापूर्ति, स्वच्छता, आवास और शहरी विकास के क्षेत्रों—में जबरदस्त तेजी देखने को मिलेगी। इसे राज्य सरकारों के भारी-भरकम आवंटन और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का मजबूत संबल मिल रहा है।
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक आदित्य झावर ने इस पर मुहर लगाते हुए कहा, “शहरी बुनियादी ढांचा आने वाले समय में पूंजीगत खर्च को एक नई रफ्तार देगा। जलापूर्ति, स्वच्छता, आवास और शहरी विकास (WSS-H-UD) सेक्टर में वृद्धि दर के दहाई आंकड़े के ऊपरी स्तर पर रहने की पूरी संभावना है।”
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
