दिवाली लक्ष्मी पूजा 2021: प्रदोष काल मुहूर्त कन्फर्म, इस समय करें पूजा

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pradosh kaal muhurat confirmed for diwali lakshmi puja on 8 november

रोशनी और आस्था के सबसे बड़े महापर्व दीवाली की धूम हर तरफ छाई हुई है। हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटकर माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपनी नगरी अयोध्या लौटे थे। उनके लौटने की खुशी में पूरी अयोध्या को दीपों से सजाकर जश्न मनाया गया था। आज भी इसी परंपरा को निभाते हुए दिवाली की रात विघ्नहर्ता भगवान गणेश और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

ऐसी गहरी आस्था है कि दीपावली की अमावस्या तिथि और प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की आराधना करने से उनका अखंड आशीर्वाद प्राप्त होता है और वे सदैव के लिए घर में वास करती हैं। हालांकि, इस बार दिवाली की सही तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ा असमंजस बना हुआ है। तो आइए, आपके इसी संशय को दूर करते हुए जानते हैं दिवाली की सटीक तिथि, लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और सरल पूजन विधि के बारे में…

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तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरूआत 08 नवंबर की सुबह 11:27 मिनट से हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 09 नवंबर 2026 की रात 12:31 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि और प्रदोष काल के आधार पर 08 नवंबर 2026 को दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। वहीं इस दिन लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 05: 54 से 07:50 बजे है और प्रदोष काल शाम 05:31 से 08:09 बजे तक है।

पूजन विधि

सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें और फिर ईशान कोण दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। अब इस पर अक्षत रखें और भगवान गणेश व मां लक्ष्मी की मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद चौकी के पास तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरकर रखें। कलश के अंदर सुपारी, एक सिक्का, अक्षत और रोली आदि डालें। फिर कलश के मुख पर आम के पत्ते रखकर उस पर दीपक रखें।

अब हाथ में थोड़ा सा जल लेकर अपने ऊपर और सभी पूजन सामग्री के ऊपर छिड़काव करें और इस दौरान ‘ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥’ मंत्र का जाप करें। फिर आचमन करने के बाद दाहिने हाथ में फल, अक्षत, फूल और जल लेकर मां लक्ष्मी और श्रीगणेश से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। दिवाली पूजा से पहले प्रथम पूज्य देवता भगवान गणेश की पूजा करें और उनको रोली, अक्षत, दूर्वा, मिठाई और धूप-दीप अर्पित करें।

इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा शुरू करें। मां लक्ष्मी को रोली, कुमकुम का तिलक करें। फिर लाल फूल, कमल, खील, बताशे, मिठाई और फल आदि अर्पित करें। इसके बाद तिजोरी में रखन के लिए पीली कौड़ियों, कुछ सिक्के, कमलगट्टे और गोमती चक्र को मां लक्ष्मी के चरणों में रखें और फिर कुबेर देव की पूजा-अर्चना करें। अब भगवान गणेश की आरती और मां लक्ष्मी की आरती करें और अंजाने में पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें। लक्ष्मी-गणेश की पूजा के बाद घर के सभी जगहों पर दीपक रखें।


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