बिहार में मछली पालन से आर्थिक सशक्तिकरण का नया सवेरा: सरकार दे रही है निःशुल्क प्रशिक्षण!
बिहार सरकार ने प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए एक शानदार पहल की है। जो भी मछली पालन के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए सरकार निःशुल्क प्रशिक्षण का सुनहरा अवसर लेकर आई है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना 2025-26 के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना का उद्देश्य न केवल मछली पालकों की आय में इजाफा करना है, बल्कि राज्य में मत्स्य उत्पादन को भी नई ऊंचाइयां देना है।
कैसे करें आवेदन और क्या है लाभ?
इस महत्वपूर्ण मत्स्य प्रशिक्षण योजना का लाभ उठाने के लिए, इच्छुक उम्मीदवार [यहां लिंक डालें] पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2025 है। यह प्रशिक्षण पूरी तरह से निःशुल्क है, जिसमें लाभार्थी से निबंधन शुल्क के अलावा कोई भी अतिरिक्त राशि नहीं ली जाएगी।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत, राज्य के अंदर और बाहर स्थित प्रतिष्ठित मात्स्यिकी संस्थानों में कुल 317 बैचों में 9,455 मत्स्य कृषकों/मछुआरों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। खास बात यह है कि प्रशिक्षणार्थियों को राज्य के बाहर स्थित संस्थानों में आने-जाने के लिए मार्ग व्यय भी सरकार की ओर से दिया जाएगा।
निबंधन शुल्क की जानकारी:
- केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, कीकीनाडा में प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षणार्थियों के लिए निबंधन शुल्क 250 रुपये है।
- अन्य सभी प्रशिक्षण संस्थानों/केन्द्रों में प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षणार्थियों के लिए निबंधन शुल्क 100 रुपये है। यह राशि उन्हें अपने संबंधित जिला मत्स्य कार्यालय में जमा करनी होगी।
किसे मिलेगी प्राथमिकता?
इस प्रशिक्षण योजना में पहली बार प्रशिक्षण लेने वाले इच्छुक कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। जो मत्स्य पालक पहले से प्रशिक्षण ले चुके हैं, उनका पुनः चयन तीन साल बाद ही किया जा सकेगा।
कौन कर सकता है आवेदन?
- राज्य के इच्छुक मत्स्य पालक जो निजी/पट्टे पर या सरकारी तालाब/जलकर में मछली पालन कर रहे हैं।
- प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सक्रिय सदस्य।
- इच्छुक कृषक जो मछली पालन शुरू करना चाहते हैं और बैंक ऋण या स्वलागत से संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए जिला मत्स्य कार्यालय द्वारा चयनित हैं।
- जिन्होंने संबंधित कार्यालय में आवेदन समर्पित किया है।
यह योजना बिहार के मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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