CBSE का बड़ा फैसला: अब हर स्कूल में काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान।

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CBSE का बड़ा फैसला: अब हर स्कूल में होंगे ‘वेलनेस और करियर’ एक्सपर्ट, जानें क्या हैं नए नियम!

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने छात्र कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अब सभी संबद्ध स्कूलों में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के साथ-साथ करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है। नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक 500 छात्रों पर एक काउंसलर का होना जरूरी है। सीबीएसई ने अपने ‘एफिलिएशन बायलॉज 2018’ में यह महत्वपूर्ण संशोधन किया है। यह खबर न केवल स्कूलों के लिए, बल्कि अभिभावकों के लिए भी बेहद जरूरी है, ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि उनके बच्चों के स्कूल में इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

CBSE का नया समीकरण: 1:500 का स्टूडेंट-काउंसलर रेशियो

सीबीएसई के इस संशोधन के बाद अब स्कूलों में काउंसलर और छात्रों का अनुपात 1:500 तय किया गया है। गवर्निंग बॉडी की मंजूरी के बाद अधिसूचित इस नियम के तहत सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को दो अलग-अलग विशेषज्ञ नियुक्त करने होंगे:

  1. काउंसलिंग और वेलनेस टीचर: जो छात्रों के सामाजिक और भावनात्मक (Socio-Emotional) पहलुओं पर ध्यान देंगे।
  2. करियर काउंसलर: जो छात्रों को भविष्य की राह चुनने में मदद करेंगे।

कौन बन सकता है ‘वेलनेस टीचर’?

इस पद के लिए उम्मीदवार के पास साइकोलॉजी (क्लिनिकल/काउंसलिंग/एप्लाइड/एजुकेशनल) में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य या काउंसलिंग में सोशल वर्क की डिग्री या किसी भी विषय में यूजी/पीजी के साथ स्कूल काउंसलिंग में डिप्लोमा होना अनिवार्य है। इन विशेषज्ञों का मुख्य काम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान, प्राइवेसी बनाए रखना और अभिभावकों व शिक्षकों को संवेदनशील बनाना होगा।

करियर काउंसलर की क्या होगी योग्यता?

करियर काउंसलर के लिए ह्यूमैनिटीज, साइंस, सोशल साइंस, मैनेजमेंट, एजुकेशन या टेक्नोलॉजी में बैचलर या मास्टर डिग्री होना आवश्यक है। उन्हें करियर असेसमेंट, भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा के विकल्पों, रिसर्च स्किल्स और छात्रों व अभिभावकों को सही मार्गदर्शन देने में सक्षम होना चाहिए।

प्रशिक्षण और विशेष छूट

नियुक्त किए गए दोनों ही विशेषज्ञों के लिए कम से कम 50 घंटे का ‘कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम’ (CBPs) पूरा करना अनिवार्य होगा। सीबीएसई ने यह राहत भी दी है कि यदि किसी स्कूल के पास फिलहाल करियर काउंसलर नहीं है, तो वे अस्थायी रूप से किसी प्रशिक्षित शिक्षक को नामित कर सकते हैं। हालांकि, उस शिक्षक को दो शैक्षणिक सत्रों के भीतर निर्धारित योग्यताएं पूरी करनी होंगी।


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