दिल्ली SIR पर खरगे का केंद्र और चुनाव आयोग पर हमला, बोले- ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ बन गई प्रक्रिया

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई चर्चित नेताओं और अधिकारियों को नोटिस मिलने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे ‘वोट चोरी’ का औजार और ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ बताया। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है।

कई बड़े नामों को SIR नोटिस

दिल्ली में SIR के दौरान करीब 33.13 लाख मतदाताओं को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में सामने आई विसंगतियों के संबंध में नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इनमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं।

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इन नोटिसों की वजह मतदाता विवरण में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ या पिछले SIR रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होना जैसी विसंगतियां हैं। अधिकारियों ने कहा है कि सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के बाद प्रविष्टियों को वैध किया जाएगा।

खरगे ने SIR को बताया ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरुआत से ही इस प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बता रही थी और अब दिल्ली में बड़े नेताओं को नोटिस मिलने के बाद इसके प्रभाव सामने आ रहे हैं।

खरगे ने SIR को लेकर भाजपा पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया और इसे ‘Frankenstein Monster’ कहा। यह खरगे की राजनीतिक टिप्पणी है, जबकि चुनाव आयोग प्रक्रिया को मतदाता सूची में विसंगतियों की पहचान और सुधार के लिए किया जा रहा पुनरीक्षण बताता है।

‘VIP और आम मतदाता में फर्क क्यों?’

खरगे ने चुनाव आयोग की ओर से ‘VIP/marked electors’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की व्यवस्था में मतदाताओं की कोई अलग ‘VIP’ श्रेणी हो सकती है।

उन्होंने संविधान में निहित One Person, One Vote, One Value के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। ये खरगे द्वारा उठाए गए राजनीतिक और संवैधानिक सवाल हैं।

चुनाव आयोग ने नोटिस पर दी सफाई

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR के तहत नोटिस जारी होना अपने आप में मतदाता का नाम हटाए जाने का संकेत नहीं है। अधिकारियों के अनुसार नोटिस उन मामलों में भेजे जा रहे हैं जहां मतदाता के फॉर्म या पुराने रिकॉर्ड में विसंगति मिली है और सत्यापन की जरूरत है।

उदाहरण के तौर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी नोटिस मिला था, लेकिन दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनकी प्रविष्टि को मान्य किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पश्चिम बंगाल के आंकड़ों का भी किया जिक्र

खरगे ने पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं की अपील का भी मुद्दा उठाया। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि शुरुआती तौर पर हटाए गए करीब 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से ज्यादा ने पुनर्स्थापना के लिए अपील की है।

वहीं ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, जिन करीब 1.2 लाख मामलों पर अपील का फैसला हो चुका है, उनमें लगभग 93% मामलों में मतदाताओं की अपील स्वीकार की गई। हालांकि यह आंकड़ा पूरे हटाए गए मतदाताओं का नहीं, बल्कि अपील पर फैसला हो चुके मामलों का है।

दिल्ली में SIR को लेकर आगे क्या?

दिल्ली में SIR के दौरान 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस दिए जाने के बाद अब दस्तावेजों का सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। चुनाव आयोग का कहना है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं का नाम केवल नोटिस जारी होने के आधार पर नहीं हटाया जाएगा।

वहीं कांग्रेस इस प्रक्रिया की पारदर्शिता, मानदंड और मतदाता अधिकारों को लेकर सवाल उठा रही है। ऐसे में दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची आने तक SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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