बिहार में चुनावी रणभेरी: आचार संहिता लागू, 8.5 लाख जवान संभालेंगे कमान!
नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है! विधान सभा के आम चुनाव और 8 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनावों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू हो गई है। 6 अक्टूबर, 2025 को चुनाव आयोग द्वारा की गई इस घोषणा ने चुनावी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। अब आयोग ने चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
8.5 लाख से ज्यादा कार्मिकों की तैनाती
बिहार में दो चरणों में होने वाले इन चुनावों के सुचारू प्रबंधन के लिए लगभग 8.5 लाख से अधिक चुनाव अधिकारियों और कर्मियों को तैनात किया गया है। इस विशाल बल में 4.53 लाख मतदान कर्मी, 2.5 लाख पुलिस अधिकारी, 28,370 मतगणना कर्मी, 17,875 माइक्रो ऑब्जर्वर, 9,625 सेक्टर अधिकारी, मतगणना के लिए 4,840 माइक्रो ऑब्जर्वर और 90,712 आंगनवाड़ी सेविकाएं शामिल हैं।
मतदाताओं की सुविधा के लिए खास इंतज़ाम
चुनाव आयोग ने मतदाताओं को सुविधा देने के लिए अनूठी पहल की है। 90,712 बीएलओ (ब्लॉक लेवल अधिकारी) और 243 ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) अब फोन कॉल और ईसीआईनेट ऐप पर “बुक-अ-कॉल टू बीएलओ” सुविधा के माध्यम से मतदाताओं के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा, किसी भी शिकायत या प्रश्न के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी/पंजीकरण अधिकारी स्तर पर कॉल सेंटर नंबर +91 (एसटीडी कोड) 1950 भी चालू कर दिया गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 28ए के तहत, सभी तैनात कार्मिकों को चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माना जाएगा।
पर्यवेक्षकों की पैनी नज़र
पहली बार, बिहार के सभी 243 निर्वाचन क्षेत्रों में एक-एक सामान्य पर्यवेक्षक तैनात किया गया है, जो आयोग की आंख और कान के रूप में काम करेगा। इनके साथ ही 38 पुलिस पर्यवेक्षक और 67 व्यय पर्यवेक्षक भी मैदान में उतारे गए हैं। ये सभी पर्यवेक्षक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे और राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों से नियमित संवाद कर उनकी चिंताओं का समाधान करेंगे।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन: AI और डीपफेक पर विशेष ध्यान
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे प्रतिद्वंद्वी दलों या उम्मीदवारों को निशाना बनाने वाले आर्टिफिशियल वीडियो के लिए AI के उपयोग पर आदर्श आचार संहिता और संबंधित दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें। यह भी साफ किया गया है कि 6 अक्टूबर, 2025 को चुनाव घोषणा के साथ ही लागू हुई आचार संहिता, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों द्वारा सोशल मीडिया सहित इंटरनेट पर पोस्ट की जाने वाली सामग्री पर भी लागू होगी। दलों और उम्मीदवारों से अपेक्षा की गई है कि वे अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के निजी जीवन के उन पहलुओं की आलोचना से बचें जिनका सार्वजनिक गतिविधियों से कोई संबंध न हो।
अनदेखी पर सख्त कार्रवाई का फरमान
चुनाव आयोग ने चेताया है कि असत्यापित आरोपों या विकृतियों के आधार पर अन्य दलों या उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना करने से बचना चाहिए। राजनीतिक दलों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सूचनाओं को विकृत करने या गलत सूचना फैलाने वाले डीपफेक वीडियो बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों के दुरुपयोग सहित चुनावी माहौल को खराब करने वाले किसी भी पोस्ट से परहेज करने का आदेश दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि इन दिशा-निर्देशों का पालन न करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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