बिहार की राजनीति में चिराग पासवान का नया दांव: ‘जाति नहीं, बिहारी पहचान’ पर जोर, विपक्ष पर तीखा हमला
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार के चुनावी परिदृश्य में एक नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनावों से पहले बिहार का विपक्ष मुद्दों से पूरी तरह खाली हो चुका है और अगले कुछ दशकों तक यह चुनावी रिकॉर्ड में सुधार के खिलाफ अपना विरोध जारी रख सकता है। मंगलवार को चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि उनके लिए राजनीति का आधार जाति नहीं, बल्कि ‘बिहारी पहचान’ है। यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब अंतिम मतदाता सूची जारी करने के चुनाव आयोग के फैसले का राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा था।
ईवीएम के बाद अब मतदाता सूची पर विपक्ष का हल्ला बोल?
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि विपक्ष लंबे समय से अपनी चुनावी असफलताओं का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ता आया है। अब, लगता है कि आने वाले दशकों तक उनका ध्यान मतदाता सूची में खामियां ढूंढने पर रहेगा। हाजीपुर के सांसद ने स्वीकार किया कि बिहार और अन्य जगहों पर मतदाता सूचियों में निश्चित रूप से सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि कई मृत व्यक्तियों के नाम अभी भी सूची में शामिल हैं।
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने आगे कहा, “विपक्ष लगातार इन चिंताओं को हमारे साथ साझा कर रहा है। अब जबकि कई लाख नामों को हटा दिया गया है, ऐसा प्रतीत होता है कि विसंगतियाँ दूर हो गई हैं। विपक्ष को यह समझना चाहिए कि चुनाव आयोग, जिस पर वे लगातार हमला करते रहते हैं, वही वह प्राधिकरण है जहाँ वे अपनी शिकायतों के निवारण के लिए जा सकते हैं।”
‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का नारा और एम-वाई समीकरण का नया अर्थ
पटना में संवाददाताओं से बात करते हुए, चिराग पासवान ने अपना रुख और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “मैं 14 करोड़ बिहारियों की बात करूंगा। बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट की बात करूंगा। मेरा दल जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता देने वाली राजनीति में विश्वास करता है।” नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव लगातार जातिगत समीकरणों की बात करते हैं।
“तेजस्वी यादव के दिमाग में ईबीसी, ओबीसी, दलित और अन्य जातियां हो सकती हैं, लेकिन हमारे लिए बिहार की जनता सिर्फ बिहारी है। जो नेता एम-वाई (मुस्लिम-यादव) का तमगा गर्व से पहनते हैं, वे हमेशा जाति आधारित राजनीति करते रहेंगे,” चिराग ने कहा।
‘महिला और युवा’ ही बनाएंगे बिहार का भविष्य
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री पासवान ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी भी एम-वाई समीकरण को मानती है, लेकिन उसका अर्थ है “महिला और युवा”। उन्होंने इसे अपनी पार्टी की नई सोच और नई पहचान बताया। “बिहार की राजनीति में अब समय आ गया है कि महिलाओं और युवाओं की ताकत को केंद्र में रखा जाए, क्योंकि यही वर्ग आने वाले बिहार को नई दिशा देगा। मेरी राजनीति का मकसद बिहार के प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करना है। जनता की समस्याएं, विकास और युवाओं के लिए रोजगार मेरे एजेंडे के प्रमुख बिंदु रहेंगे,” चिराग पासवान ने जोर देकर कहा।
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