‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ फिल्म रिव्यू: वर्दी के फर्ज और परिवार के बोझ के बीच न्याय की एक तीखी पुकार
‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ महज़ एक क्राइम-ड्रामा नहीं, बल्कि वर्दीधारी महिलाओं के उस अंतर्द्वंद की कहानी है, जहाँ उन्हें पेशेवर कर्तव्यों, घरेलू जिम्मेदारियों और अपनी काबिलियत साबित करने के लिए हर कदम पर अग्निपरीक्षा देनी पड़ती है। अंबिका पंडित के निर्देशन में सजी इस फिल्म की असली जान निमिषा सजयन हैं, जिन्होंने असिस्टेंट सब-इस्पेक्टर (ASI) बबीता सिंह के किरदार में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। एक निजी त्रासदी और अपने जिगरी दोस्त की रहस्यमयी मौत के बाद शुरू हुई न्याय की यह जंग जितनी पेशेवर है, उतनी ही जज्बाती भी। बबीता का किरदार पेशेवर चुनौतियों और निजी उलझनों का एक ऐसा ताना-बाना है, जो दर्शकों को अंत तक बाँधे रखता है। एक मज़बूत महिला नायक और क्राइम-ड्रामा के रोमांचक तत्वों से लैस यह फिल्म निमिषा की शानदार परफॉर्मेंस के कारण बेहद खास बन पड़ी है।
कहानी: जब खाकी का फर्ज भावनाओं से टकराया
फिल्म की पटकथा एक महिला पुलिस अधिकारी के कर्तव्य और संवेदनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। ASI बबीता सिंह (उर्फ बेबी) अपने भ्रष्ट सीनियर के कहने पर एक झूठा केस अपने सिर ले लेती है, ताकि उसे दो हफ्ते का सस्पेंशन मिल सके और वह शांति से अपने ससुराल जा सके। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। वहाँ उसकी मुलाकात बचपन के गहरे दोस्त बंसी से होती है, जिसकी संदिग्ध हालात में हत्या हो जाती है। अब शुरू होता है बबीता के असली इम्तिहान का दौर। पति, ससुराल और समाज के तीखे विरोध के बीच, सरकारी तंत्र की बेरुखी के बावजूद, वह अपने दोस्त को इंसाफ दिलाने के लिए अकेले ही मैदान में उतर जाती है। जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, परतें खुलती हैं और पता चलता है कि इस खौफनाक जुर्म का कातिल कोई बाहर का नहीं, बल्कि उसका अपना ही है। तमाम बाधाओं को तोड़कर बबीता जिस तरह सच को सामने लाती है, वह उसके फौलादी इरादों की गवाही देता है।
कास्ट और परफॉर्मेंस: निमिषा सजयन की दमदार मौजूदगी
इस प्रोजेक्ट की सबसे मज़बूत कड़ी निमिषा सजयन हैं। एक दृढ़ निश्चयी पुलिस अफसर और एक संघर्षरत पत्नी के रूप में उनकी परफॉर्मेंस में गजब की गहराई है। उनकी सधी हुई एक्टिंग जाँच और जज्बात के पलों को जीवंत कर देती है। मलयालम सिनेमा की यह दिग्गज अभिनेत्री यहाँ भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रही है।
बबीता के पति शरद वशिष्ठ के रूप में अंशुमान पुष्कर ने एक सहयोगी साथी की भूमिका बखूबी निभाई है, हालांकि कुछ दृश्यों में निमिषा की मज़बूत स्क्रीन प्रेजेंस के सामने वह थोड़े दबते नज़र आते हैं। राजेश कुमार ने SI सेठी के रूप में एक ऐसे भ्रष्ट और मतलबी अफसर का किरदार निभाया है, जो असलियत के करीब लगता है। वहीं नवल शुक्ला ने एक ईमानदार SHO के रूप में अपनी सधी हुई एक्टिंग से दर्शकों का भरोसा जीता है। बरुन सोबती (बंसी सैनी) के पास स्क्रीन समय कम था, लेकिन वह अपनी मौजूदगी से कहानी को एक नया मोड़ देने में सफल रहे हैं। सुनीता राजवार ने बबीता की सास के रूप में एक पारंपरिक भारतीय सास की छवि को बड़ी सहजता और स्वाभाविकता के साथ पर्दे पर उतारा है।
निर्देशन: जज्बात और संतुलन का मेल
निर्देशक अंबिका पंडित ने हर किरदार की भावनाओं को बारीकी से कुरेदने की कोशिश की है। उन्होंने फिल्म को सिर्फ एक रूखी इन्वेस्टिगेशन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि एक महिला पुलिस अफसर की निजी और पेशेवर जिंदगी के बीच के संतुलन को बखूबी दिखाया है। यही बात बबीता के किरदार को और भी विश्वसनीय बनाती है। हालांकि, फिल्म के निर्देशन में कुछ खामियां भी खटकती हैं। कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे हैं और जाँच की प्रक्रिया में कुछ खास नयापन नहीं दिखता। उदाहरण के तौर पर, बबीता का सबूतों की तलाश में बार-बार जंगल जाना कहानी की रफ़्तार को थोड़ा उबाऊ और दोहराव भरा बना देता है।
फिल्म का अनावश्यक ड्रामा कभी-कभी मुख्य कहानी के प्रभाव को कम कर देता है। अंबिका का निर्देशन तब सबसे ज्यादा निखरता है जब वह बबीता के अंतर्मन के संघर्ष को दिखाती हैं। बेहतर संपादन (Editing) इस फिल्म को और भी धारदार बना सकता था।
खूबियां और कमियां: अंतिम फैसला
‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ की सबसे बड़ी जीत इसका महिला सशक्तिकरण वाला दृष्टिकोण है। यह फिल्म बबीता को एक ऐसी सशक्त नारी के रूप में पेश करती है जो एक कुशल गृहिणी और एक निडर ASI अफ़सर, दोनों भूमिकाओं में खरी उतरती है। बैकग्राउंड स्कोर नाटकीय दृश्यों में जान फूँकता है, लेकिन कभी-कभी यह अभिनय और स्क्रिप्ट पर हावी होने की कोशिश करता है।
निश्चित रूप से कहानी को थोड़ा और चुस्त बनाया जा सकता था, फिर भी बबीता का किरदार इस फिल्म को डूबने नहीं देता। यह फिल्म सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं है, बल्कि एक बहादुर महिला के साहस और संघर्ष का दस्तावेज़ है। इसकी सादगी भरी कहानी बिना किसी तामझाम के सीधे अपनी बात कहती है। धीमी रफ़्तार के बावजूद, दमदार अभिनय और मज़बूत निर्देशन इसे देखने लायक बनाते हैं।
रेटिंग: 2.5/5 स्टार
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


