(मोना पार्थसारथी)
वॉवरे (बेल्जियम), 28 अगस्त: हॉकी के मैदान पर रोमांच की ऐसी पराकाष्ठा कम ही देखने को मिलती है। आखिरी सीटी बजने से ठीक 26 सेकंड पहले, जब हार लगभग तय दिख रही थी, तब कप्तान हरमनप्रीत सिंह के करिश्माई गोल ने भारत को मुकाबले में वापस ला खड़ा किया। सह-मेजबान बेल्जियम के खिलाफ विश्व कप के इस घमासान में निर्धारित समय तक स्कोर 3-3 से बराबर रहा, लेकिन अंततः शूटआउट के ‘नर्वस गेम’ में बेल्जियम ने 4-3 से बाजी मार ली। इस हार के साथ भारतीय टीम टूर्नामेंट में आठवें स्थान पर रही। दुनिया की दूसरे नंबर की टीम बेल्जियम ने अंतिम मिनट तक 3-2 की बढ़त बना रखी थी, पर 26वें सेकंड में मिले पेनल्टी कॉर्नर को हरमनप्रीत ने गोल में बदलकर स्टेडियम में सन्नाटा पसरा दिया। यह इस विश्व कप में उनका आठवां व्यक्तिगत गोल था।
पेनल्टी शूटआउट के तनावपूर्ण क्षणों में भारत की ओर से शिलानंद लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह और अभिषेक ने तो सफलतापूर्वक गोल किए, लेकिन कप्तान हरमनप्रीत और सुखजीत सिंह के निशाने चूक गए। दूसरी तरफ, बेल्जियम के टॉम बून, आर्थर डि स्लूवेर, अलेक्जेंडर हेंडरिक्स और रोमन डुवेकोट ने गेंद को जाल में उलझाकर अपनी टीम को जीत दिला दी, जबकि विक्टर फूबर्ट का शॉट नाकाम रहा। नीदरलैंड में अपने शुरुआती मैच खेलने के बाद भारतीय टीम बेल्जियम की ठंडी हवाओं और बेल्फियस हॉकी एरेना में उमड़े हजारों घरेलू समर्थकों के बीच उतरी थी। भारत ने शुरुआत में बढ़त लेकर दबाव बनाया, लेकिन बेल्जियम जैसी विश्व स्तरीय टीम के सामने उस लय को अंत तक बरकरार नहीं रख सका।
एक दिन पहले ही एम्सटेलवीन में भारतीय महिला टीम ने जर्मनी को हराकर पांचवां स्थान हासिल किया था, जिससे पुरुष टीम से भी जीत के साथ विदाई की उम्मीदें बढ़ गई थीं। हालांकि, लचर डिफेंस एक बार फिर टीम की कमजोरी साबित हुआ। मैच के शुरुआती क्वार्टर में एक अजीबोगरीब वाकया हुआ, जब मैदान पर गोलकीपर के अलावा 11 भारतीय खिलाड़ी (कुल 12) मौजूद थे। इस तकनीकी गलती के कारण कप्तान हरमनप्रीत को पीला कार्ड मिला और उन्हें 5 मिनट के लिए मैदान से बाहर बैठना पड़ा। भारत के लिए छठे मिनट में अभिषेक ने शानदार फील्ड गोल किया, जबकि हरमनप्रीत ने 31वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील किया।
बेल्जियम के लिए रोमन डुवेकोट (22वां), हुगो लाबूशेरे (23वां) और निकोलस डि करपल (47वां) ने स्कोर शीट में अपना नाम दर्ज कराया। आखिरी क्वार्टर में भारत को तब बड़ा झटका लगा जब अनुभवी मनप्रीत सिंह के चेहरे पर लाबूशेरे का तेज शॉट लगा। दर्द से कराहते मनप्रीत को मैदान छोड़ना पड़ा, चोट इतनी गंभीर लग रही थी कि आंखों पर खतरा मंडरा रहा था, लेकिन उनके जज्बे की दाद देनी होगी कि वे शूटआउट के दौरान फिर मैदान पर लौट आए।
51 वर्षों बाद विश्व कप पदक जीतने का सपना संजोकर उतरी भारतीय टीम का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। पहले दौर में वेल्स (3-1) और पाकिस्तान (5-3) को हराने वाली टीम इंग्लैंड से 2-4 से हार गई। दूसरे दौर में किस्मत ने साथ नहीं दिया; नीदरलैंड के खिलाफ आखिरी 19 मिनट में तीन गोल गंवाकर टीम 1-3 से हारी और अर्जेंटीना के हाथों मिली 5-3 की शिकस्त ने सेमीफाइनल की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बेल्जियम का दबदबा इस साल प्रो लीग के दोनों मैचों में भी रहा था।
इतिहास गवाह है कि बेल्जियम अक्सर भारत के लिए बड़ी बाधा रहा है। पेरिस ओलंपिक के पहले ही मैच में भारत 1-2 से हारा था, वहीं टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में इसी टीम ने भारत को 5-2 से हराकर स्वर्ण की दौड़ से बाहर किया था। हालांकि, बेल्जियम का अपना विश्व कप अभियान भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और ऑस्ट्रेलिया व स्पेन से ड्रॉ खेलने के बाद वे भी सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो गए थे। मैच की बात करें तो तीसरे मिनट में मनप्रीत ने बाएं फ्लैंक से बेहतरीन हमला बोला था, लेकिन डी के भीतर फिनिशिंग की कमी खली।
भारत को छठे मिनट में तब सफलता मिली जब अभिषेक के शॉट पर गेंद गोलकीपर के पैड से लगकर डिफेंडर हेंडरिक्स की स्टिक से टकराई और गोल में समा गई। बेल्जियम ने पलटवार करते हुए पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, पर गोलकीपर सूरज करकेरा ने हेंडरिक्स की ड्रैग फ्लिक का शानदार बचाव किया। आठवें मिनट में थिबू स्टॉकब्रोक्स के रिवर्स हिट को जुगराज सिंह ने अपनी स्टिक के जादू से रोका। 11वें मिनट में 12 खिलाड़ियों वाली गलती के कारण हरमनप्रीत के बाहर जाने से भारत दबाव में आ गया।
बेल्जियम को 12वें मिनट में लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन करकेरा दीवार बनकर खड़े रहे। 20वें मिनट में हरमनप्रीत की ड्रैग फ्लिक बेल्जियम के रशर्स ने रोक दी। 22वें मिनट में बेल्जियम ने रोमन के गोल से बराबरी की, जहाँ गोलकीपर मोहित के आगे आने का फायदा बेल्जियम को मिला। अगले ही मिनट हुगो की तूफानी ड्रैग फ्लिक ने बेल्जियम को 2-1 से आगे कर दिया। पहले हाफ के आंकड़ों में बेल्जियम ने 15 बार भारतीय गोल पर हमला किया, जबकि भारत केवल तीन बार वहां पहुंच सका।
दूसरे हाफ के पहले ही मिनट में हरमनप्रीत ने गोल कर स्कोर 2-2 कर दिया। इसी बीच अमित रोहिदास ने अपने करियर का 250वां मैच खेलते हुए कई बेहतरीन बचाव किए। तीसरे क्वार्टर में हरमनप्रीत को ग्रीन कार्ड मिलने से फिर बाहर जाना पड़ा। अंतिम क्वार्टर में निकोलस ने बेल्जियम के लिए तीसरा गोल दागा, जिस पर भारतीय कप्तान ने विरोध जताया लेकिन वीडियो अंपायर ने उसे सही करार दिया। अंत में भारत ने गोलकीपर हटाकर ‘ऑल आउट’ अटैक किया और हूटर बजने से ठीक 26 सेकंड पहले हरमनप्रीत ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर मैच को शूटआउट तक पहुँचाया, जहाँ किस्मत ने बेल्जियम का साथ दिया।
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