टीनू आनंद का विवादास्पद बयान: क्या गांजा वाकई रचनात्मकता बढ़ाता है?
नई दिल्ली: बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता और निर्देशक टीनू आनंद ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है जिसने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। उन्होंने गांजे के सेवन और उस पर कलाकारों की रचनात्मकता के प्रभाव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। आनंद का मानना है कि गांजा पीने से कलाकारों की रचनात्मकता बढ़ती है, क्योंकि इससे उनका ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है।
बॉलीवुड बबल के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, टीनू आनंद ने इस बात पर जोर दिया कि गांजा का सेवन व्यक्ति के ध्यान को एक बिंदु पर केंद्रित करता है, जो रचनात्मक कार्यों में सहायक होता है। उन्होंने कहा, “सारे इंद्रियां एक जगह जमा होकर केंद्रित होती हैं। जब ऐसा होता है, तो उस फोकस से आप जो कुछ भी बनाते हैं, वह भी एक अलग तरह का फोकस बन जाता है। यह सच है।”
अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए, टीनू आनंद ने हॉलीवुड की फिल्म ‘ईजी राइडर’ का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इस फिल्म का निर्माण एसिड ट्रिप पर रहते हुए किया गया था, जिसमें निर्देशक, कैमरामैन और दोनों अभिनेता शामिल थे। उन्होंने कहा, “आप फिल्म का नतीजा देखिए, पागल कर देती है फिल्म।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या बॉलीवुड में भी ऐसा होता है, तो टीनू आनंद ने स्वीकार किया कि कुछ कलाकार ऐसा करते हैं, जबकि कुछ नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि काम के दौरान ऐसा कोई नहीं करता, बल्कि निजी पलों में कुछ लोग इसका सेवन करते हैं।
टीनू आनंद ने गांजे को “बुरी चीज़” बताते हुए कहा कि इसकी एक “अच्छी चीज़” भी है। उन्होंने समझाया, “अच्छी चीज़ यह है कि आपको मौका मिल जाता है कि आप फोकस करेंगे और आप जो बनाएंगे वह शायद एक मास्टरपीस हो।”
यह ध्यान देने योग्य है कि ये टीनू आनंद के व्यक्तिगत विचार हैं। हम किसी भी तरह के नशे के सेवन का समर्थन नहीं करते हैं। नशा एक बुरी चीज़ है और इससे दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
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