दिवाली पर ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ ‘एक दीवाने की दीवानियत’ का साहसिक कदम, क्या बदलेगा फिल्मों का ट्रेंड?
नई दिल्ली: हर साल दिवाली के पावन अवसर पर, निर्माता ऐसी कहानियां परोसते हैं जो पूरे परिवार के साथ बैठकर देखी जा सकें। पिछले दो दशकों से, यह परंपरा चली आ रही है कि त्योहारी सीजन में पारिवारिक और भावनात्मक फिल्मों को प्राथमिकता दी जाती है।
लेकिन इस साल यह चलन कुछ बदलता नजर आ रहा है। फिल्म ‘एक दीवाने की दीवानियत’ ने इस स्थापित परंपरा को चुनौती देते हुए, त्योहारी सीजन में ‘एडल्ट’ सर्टिफिकेट के साथ रिलीज होने का एक साहसिक निर्णय लिया है। यह फिल्म 21 अक्टूबर को, दिवाली वीकेंड पर सिनेमाघरों में दस्तक देगी।
सेंसर बोर्ड की कैंची चली, फिर मिला ‘ए’ का ठप्पा
सेंसर बोर्ड ने फिल्म की समीक्षा के बाद, इसमें 6 दृश्यों को हटाने या उनमें बदलाव की सिफारिश की थी। इन आवश्यक संशोधनों के बाद ही फिल्म को ‘ए’ (एडल्ट) सर्टिफिकेट दिया गया, जिससे यह केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के दर्शकों के लिए ही देखने योग्य रह गई है।
इसी दिन, आयुष्मान खुराना और हर्षवर्धन राणे की फिल्म ‘थामा’ भी रिलीज हो रही है, जिसे यू/ए सर्टिफिकेट मिला है। यह एक हॉरर-कॉमेडी फैमिली एंटरटेनर है, जो सभी उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त है। ऐसे में, उम्मीद है कि पारवारिक दर्शक ‘थामा’ को अधिक प्राथमिकता दे सकते हैं।
क्या ‘ए’ सर्टिफिकेट साबित होगा फिल्म के लिए चुनौती?
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि केवल ‘एडल्ट’ सर्टिफिकेट मिलने से ‘एक दीवाने की दीवानियत’ की कमाई पर असर पड़ेगा। इससे पहले भी ‘एनिमल’ और ‘कुली’ जैसी फिल्मों ने ‘ए’ सर्टिफिकेट के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी फिल्मों का अपना एक विशेष दर्शक वर्ग होता है, जो कंटेंट को महत्व देता है। यही दर्शक वर्ग सिनेमाघरों तक फिल्म देखने जरूर पहुंचते हैं, जिससे फिल्म को सफलता मिल सकती है। इसके अलावा, हर्षवर्धन राणे की फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ की हाल ही में हुई री-रिलीज और उसके प्रति लोगों के क्रेज को देखते हुए, इस फिल्म को भी दर्शकों का समर्थन मिल सकता है। हालांकि, दोनों ही फिल्में अपनी-अपनी जगह बड़ी हैं।
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