कुमार सानू की आवाज़ और पहचान की रक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में दस्तक
80 और 90 के दशक के दिलों को जीतने वाले, बॉलीवुड के किंग ऑफ मेलोडी, कुमार सानू, आज अपनी अनूठी आवाज़, कला और पहचान की कानूनी सुरक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण में आए हैं। ऑनलाइन दुनिया में सेलिब्रिटी पहचान के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए, गायक ने अपने नाम, आवाज़, गायन की शैली और तस्वीरों सहित अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।
सोमवार को, न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा, इस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई कर सकते हैं, जो न केवल कुमार सानू के लिए, बल्कि अन्य कलाकारों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकती है।
एआई का दुरुपयोग और कलाकार का संघर्ष
अपनी याचिका में, कुमार सानू ने चिंता जताई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके लोग उनकी आवाज़ और चेहरे की हूबहू नकल कर रहे हैं। इससे भी बढ़कर, उनकी आवाज़ और शक्ल का इस्तेमाल करके ऑडियो-वीडियो सामग्री बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जा रही है, जिसका व्यावसायिक लाभ उठाया जा रहा है।
इस गंभीर मुद्दे पर कार्रवाई करते हुए, कुमार सानू ने न्यायालय से एक स्पष्ट आदेश की मांग की है। याचिका में उनकी आवाज़, गायन की विशिष्ट तकनीक, उनके विशिष्ट हाव-भाव, तस्वीरें, व्यंग्यचित्र, हस्ताक्षर और उनके व्यक्तित्व के अन्य सभी अनूठे पहलुओं का किसी भी तरह के व्यावसायिक या व्यक्तिगत उपयोग पर बिना अनुमति के रोक लगाने की मांग की गई है।
जनता में भ्रम और पहचान का क्षरण
यह याचिका इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) इन अनमोल व्यक्तिगत विशेषताओं का दुरुपयोग करके जनता में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी रचनात्मकता का अवमूल्यन हो रहा है, बल्कि उनकी दशकों की मेहनत से बनाई गई पहचान को भी धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम कला और कलाकारों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में ऐसे दुरुपयोग को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
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