पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन पर ‘चलो जीते हैं’ का भव्य पुन: प्रदर्शन: गुमनाम नायकों को सम्मान, छात्रों को प्रेरणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में, 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक एक विशेष फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान, 2018 में प्रदर्शित हुई प्रेरणादायक लघु फिल्म ‘चलो जीते हैं’ को पूरे देश के विद्यालयों और लगभग 500 सिनेमाघरों में पुनः रिलीज किया जाएगा। यह अनूठी पहल छात्रों को समाज के उन “गुमनाम नायकों” के साथ फिल्म देखने का अवसर प्रदान करेगी, जो हमारे दैनिक जीवन को सुचारू रूप से चलाने में चुपचाप योगदान देते हैं – जैसे चौकीदार, सफाईकर्मी, ड्राइवर, चपरासी और अन्य।
75वें जन्मदिन का उत्सव और ‘सेवा का सम्मान’
बुधवार को 75 वर्ष के हो रहे प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के साथ ही यह फिल्म स्क्रीनिंग शुरू हो रही है। ‘चलो जीते हैं: सेवा का सम्मान’ पहल के तहत, न केवल फिल्म प्रदर्शित की जाएगी, बल्कि समाज के इन गुमनाम नायकों को सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जाएगा। विद्यालयों में फिल्म की प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करना और उन्हें सेवा के महत्व को समझाना है।
स्वामी विवेकानंद के दर्शन से प्रेरित ‘चलो जीते हैं’
‘चलो जीते हैं’ फिल्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन की एक मार्मिक घटना से प्रेरित है। यह फिल्म युवा नारू की कहानी को दर्शाती है, जो स्वामी विवेकानंद के “बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं” के महान दर्शन से गहराई से प्रभावित होकर, उसके अर्थ को समझने और अपनी छोटी सी दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करता है। यह फिल्म स्वामी विवेकानंद के विचारों को एक सुंदर सिनेमाई श्रद्धांजलि है।
2018 की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली लघु फिल्म
मंगेश हदावले द्वारा निर्देशित और आनंद एल. राय तथा जैन द्वारा प्रस्तुत, ‘चलो जीते हैं’ 2018 की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली लघु फिल्मों में से एक रही है। इसकी पुनः रिलीज छात्रों और समाज के गुमनाम नायकों के बीच एक मजबूत जुड़ाव स्थापित करने और सेवा तथा समर्पण की भावना को बढ़ावा देने का एक शानदार अवसर प्रदान करेगी।
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