भारतीय सिनेमा के कैनवास पर वैश्विक चमक कोई नई बात नहीं है। ‘लगान’ (2001) में एलिजाबेथ रसेल बनकर दिल जीतने वाली रेचल शेली हों या ‘कम्बख्त इश्क’ (2009) में अपना जलवा बिखेरने वाले हॉलीवुड लेजेंड सिल्वेस्टर स्टेलोन—विदेशी सितारों ने हमेशा भारतीय फिल्मों में अपना खास रंग भरा है। लेकिन इस बार, भारतीय सिनेमा एक ऐसी एंट्री का गवाह बनने जा रहा है, जिसने 90 और 2000 के दशक के फैंस की यादों के गलियारों में हलचल मचा दी है।
हॉलीवुड की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘द ममी’ (The Mummy) में अपनी डरावनी आंखों और खूंखार अभिनय से दुनिया को डराने वाले ‘इमहोतेप’ यानी दक्षिण अफ्रीकी स्टार अर्नोल्ड वोस्लो (Arnold Vosloo) अब अपना भव्य भारतीय डेब्यू करने के लिए तैयार हैं।
विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की ‘रणबाली’ में मचेगा तहलका
अर्नोल्ड वोस्लो की यह एंट्री साउथ सिनेमा के विजनरी निर्देशक राहुल सांकृतियन की फिल्म ‘रणबाली’ (Ranabali) के जरिए हो रही है। इस मेगा-प्रोजेक्ट में वे साउथ सुपरस्टार विजय देवरकोंडा और ‘नेशनल क्रश’ रश्मिका मंदाना के साथ स्क्रीन साझा करते नजर आएंगे। हाल ही में जारी हुए वोस्लो के फर्स्ट-लुक पोस्टर ने इंटरनेट पर सनसनी फैला दी है, जिसमें उनका अवतार बेहद क्रूर और घातक दिखाई दे रहा है।
- किरदार का नाम: सर थियोडोर हेक्टर (एक निर्दयी ब्रिटिश अधिकारी)
- उपाधि: ‘डीमन ऑफ ड्राउट’ (सूखे का राक्षस)
- फिल्म की पृष्ठभूमि: यह फिल्म 1854-1858 के दौर पर आधारित एक पीरीयड ड्रामा है। फिल्म ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के उस चरम दौर को जीवंत करेगी, जहां विजय देवरकोंडा और अर्नोल्ड वोस्लो के बीच एक रोंगटे खड़े कर देने वाली टक्कर देखने को मिलेगी।
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‘इमहोतेप’ का वो भारतीय क्रेज और पुरानी यादें
आज की पीढ़ी के लिए वोस्लो भले ही नए हों, लेकिन केबल टीवी और दूरदर्शन के दौर में बड़े हुए दर्शकों के लिए ‘इमहोतेप’ एक नाम नहीं, बल्कि खौफ का दूसरा नाम था। 1999 में ‘द ममी’ और 2001 में ‘द ममी रिटर्न्स’ के हिंदी डब वर्जन ने भारतीय घरों में अर्नोल्ड वोस्लो को एक पॉप-कल्चर आइकन बना दिया था।
दिलचस्प बात यह थी कि उनका किरदार सिर्फ एक बेरहम राक्षस का नहीं था। ‘इमहोतेप’ की खूंखार शक्ल के पीछे अपनी प्रेमिका ‘एंक-सु-नामुन’ को पुनर्जीवित करने का एक अटूट और दुखद जुनून छिपा था। इसी ‘ग्रे शेड’ और इमोशनल गहराई ने उन्हें भारतीय दर्शकों का पसंदीदा खलनायक बना दिया था।
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थिएटर से हॉलीवुड के शिखर तक: वोस्लो का सफर
अर्नोल्ड वोस्लो का एक मंझे हुए कलाकार के रूप में सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है:
- शुरुआती संघर्ष: वैश्विक ख्याति पाने से पहले, 1970 और 80 के दशक में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक थिएटर कलाकार के रूप में अपनी धाक जमाई थी। ‘बोटी गान बॉर्डर टो!’ (1984) जैसी फिल्मों ने उनकी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।
- हॉलीवुड में धाक: अमेरिका शिफ्ट होने के बाद उन्होंने ‘डार्कमैन’ सीरीज और ज्यां-क्लोड वैन डैम की ‘हार्ड टारगेट’ में विलेन के किरदार को एक नई परिभाषा दी।
- ओटीटी और टीवी की दुनिया: टीवी पर भी उनका दबदबा कम नहीं रहा। सुपरहिट सीरीज ’24’ के चौथे सीजन में आतंकवादी मास्टरमाइंड ‘हबीब मारवान’ का उनका किरदार आज भी याद किया जाता है। इसके अलावा वे ‘बॉश’ और ‘जैक रायन’ जैसी प्रसिद्ध वेब सीरीज में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं।
कब होगा ‘रणबाली’ का दीदार?
बहुमुखी प्रतिभा के धनी अर्नोल्ड वोस्लो को एक बार फिर उसी खूंखार और प्रतिष्ठित विलेन के अवतार में देखना सिनेमा प्रेमियों के लिए किसी पर्व से कम नहीं होगा। विजय देवरकोंडा के साथ उनकी यह भिड़ंत बड़े पर्दे पर क्या रंग लाएगी, इसका फैसला 11 सितंबर, 2026 को होगा, जब ‘रणबाली’ दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देगी।
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