चित्रा में माता छिन्नमस्तिका काली की प्राचीन प्रतिमा का भव्य उत्सव: आस्था और परंपरा का संगम
चित्रा कोलियरी में स्थित सदियों पुरानी माता छिन्नमस्तिका काली मंदिर, आस्था और भक्ति के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। सोमवार को इस पवित्र स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। मंदिर को नए सिरे से रंग-रोगन किया गया है और विद्युत सज्जा से इसे एक विशेष आकर्षण प्रदान किया जा रहा है। रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाता मंदिर प्रांगण, भक्तों के आगमन की प्रतीक्षा में अलंकृत हो उठा है।
भजन संध्या का आयोजन, आस्था का संगीत गूँजेगा
पूजा-अर्चना के साथ-साथ, सोमवार की रात्रि में “राधे-राधे म्यूजिकल ग्रुप” के कलाकारों द्वारा एक मनमोहक भजन संध्या का आयोजन भी किया जाएगा। यह आयोजन, भक्तों के लिए भक्तिमय माहौल को और भी सुदृढ़ करेगा, जहाँ वे संगीत और भजन के माध्यम से माता का गुणगान कर सकेंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और श्रद्धालुओं का विश्वास
यज्ञ समिति ट्रस्ट चित्रा कोलियरी के अध्यक्ष, श्री विवेका नारायण देव ने इस प्राचीन मंदिर के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह मंदिर राजा चित्रसेन के कार्यकाल से स्थापित माता की प्रतिमा के कारण अत्यंत प्राचीन है। लगभग चार-पांच पीढ़ियों से यहाँ पूजा-अर्चना का क्रम चला आ रहा है। यह भी कहा जाता है कि झारखंड के प्रसिद्ध रजरप्पा स्थित माता छिन्नमस्तिका काली मंदिर के पश्चात, चित्रा में ही माता छिन्नमस्तिका काली की प्रतिमा स्थापित है। इसी मान्यता के चलते, चित्रा, सारठ, पालोजोरी और सुदूर क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
मुख्य आकर्षण:
- राजा चित्रसेन के कार्यकाल से स्थापित माता छिन्नमस्तिका की प्रतिमा।
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