किसानों का हुंकार: मांगे न मानी तो बढ़ेगा आंदोलन, आज ग्रेटर नोएडा में महापंचायत
ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट पर आज सैकड़ों किसानों की महापंचायत का आयोजन होने वाला है, जहां भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखेंगे। आगरा से लेकर गौतम बुद्ध नगर तक के किसान एकजुट होकर अपनी लंबे समय से अनसुनी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं।
तैयारियां पूरी, मंच सज चुका:
इस महापंचायत की तैयारियां कई दिनों से चल रही थीं। जीरो प्वाइंट पर बैठक के लिए कालीन और दरी बिछाकर व्यापक व्यवस्था की गई है। मंच और साउंड सिस्टम भी तैयार है, जबकि फ्लाईओवर के खंभों पर किसानों से जुड़े मुद्दों और पंचायत के संदेश देते पोस्टर-बैनर लगाए गए हैं। यह सब इस बात का संकेत है कि यह आयोजन पूरी तैयारी और सुनियोजित ढंग से हो रहा है। किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों से लगातार यहां पहुंच रहे हैं।
मुख्य मांगें, जो कर रही हैं किसानों को आंदोलित:
किसानों की प्रमुख मांगों में 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर का भुगतान, सर्किल रेट में बढ़ोतरी, 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट का आवंटन, वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का पूर्ण कार्यान्वयन, विस्थापन नीति में सुधार, प्रभावित परिवारों को रोजगार और आबादी का निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
विकास के नाम पर जमीन, पर वादे अधूरे:
किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीन तो ले ली गई, लेकिन मुआवजे और पुनर्वास के वादे आज तक पूरे नहीं किए गए। किसान नेताओं का आरोप है कि बार-बार ज्ञापन और प्रदर्शनों के बावजूद प्रशासन और प्राधिकरण उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
सरकार को कड़ा संदेश देने की रणनीति:
इसी हताशा के चलते आज की महापंचायत के जरिए सरकार और प्रशासन को एक मजबूत संदेश देने की रणनीति बनाई गई है। इस महापंचायत के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन भी सतर्क है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
शांतिपूर्ण आंदोलन, पर चेतावनी भी:
किसानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा। हालांकि, यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगे और भी बड़ा आंदोलन करने को तैयार हैं। ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट पर होने वाली यह किसान महापंचायत न सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बल्कि आगरा से लेकर गौतम बुद्ध नगर तक के किसानों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
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