बलिया के रसड़ा से बसपा विधायक और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह को शुक्रवार को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। खराब मौसम के बावजूद राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की बड़ी भीड़ अंतिम यात्रा में शामिल हुई।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
उमाशंकर सिंह का पार्थिव शरीर गुरुवार रात नगरा थाना क्षेत्र के खनवर गांव स्थित उनके पैतृक आवास पहुंचा था। शुक्रवार को उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। हल्की बूंदाबांदी के बीच भी अंतिम यात्रा में शामिल लोगों का उत्साह और भावनाएं कम नहीं हुईं।
शाम को अंतिम यात्रा बलिया जिला मुख्यालय के पास स्थित श्रीरामपुर घाट पहुंची, जहां गंगा नदी के तट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। विधायक के बेटे प्रिंस यूकेश सिंह ने मुखाग्नि दी।
अलग-अलग दलों के नेता पहुंचे
उमाशंकर सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता पहुंचे। बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक हंसू राम, पूर्व मंत्री नारद राय और भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्र ने परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की।
इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह हुए भावुक
उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। वह उमाशंकर सिंह के समधी हैं। इस दौरान वह भावुक होकर रो पड़े।
उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह के इलाज के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हर संभव प्रयास किया गया। उनके मुताबिक, बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए लगातार संपर्क और प्रयास किए गए थे।
‘हर राजनीतिक दल के लोग दुखी’
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उमाशंकर सिंह के निधन से हर राजनीतिक दल के लोग दुखी हैं। उनके अनुसार, दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह को केवल एक राजनीतिक दल तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। क्षेत्र में उनकी अपनी अलग पहचान और लोगों के बीच मजबूत जुड़ाव था।
बेटे को लेकर कही भावुक बात
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने उमाशंकर सिंह के छोटे बेटे को लेकर भी भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक दिन उनका छोटा बेटा बड़ा उमाशंकर बनेगा। इस बयान के दौरान वहां मौजूद लोग भी भावुक नजर आए।
उमाशंकर सिंह का बुधवार रात दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हुआ था। वह 55 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे।
उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने उनके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव की तस्वीर सामने रख दी। एक विधायक के रूप में उनकी यात्रा भले ही अब थम गई हो, लेकिन उनके परिवार और समर्थकों के लिए उनकी विरासत आगे बढ़ाने की चुनौती अब नई पीढ़ी के सामने है।
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