अगले वित्त वर्ष से खनिज क्षेत्र में बड़ी क्रांति: दस्तक देने को तैयार है भारत का पहला ‘मिनरल एक्सचेंज’!

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खनिज क्षेत्र में बड़ी क्रांति: अगले साल से शुरू होगा भारत का पहला ‘मिनरल एक्सचेंज’

भारत के खनन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। देश का पहला ‘खनिज एक्सचेंज’ अगले वित्त वर्ष तक पंजीकृत होकर पूरी तरह परिचालन में आ सकता है। खान मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव वीणा कुमारी डर्मल ने फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (फिमी) की 60वीं वार्षिक आम बैठक में यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस एक्सचेंज के पंजीकरण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और उम्मीद है कि अगले साल तक यह धरातल पर उतर आएगा।

यह एक्सचेंज खनिजों की खरीद-बिक्री के लिए एक पारदर्शी, इलेक्ट्रॉनिक और डिलीवरी-आधारित आधुनिक मंच होगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बाजार की शक्तियों के आधार पर खनिजों की सही कीमत तय हो सकेगी, जिससे उत्पादकों और खरीदारों के बीच सूचनाओं का अंतर खत्म होगा। उल्लेखनीय है कि मंत्रालय ने जून में ही ‘खनिज एक्सचेंज नियम, 2026’ अधिसूचित कर दिए थे, जिसका उद्देश्य गुणवत्ता के मानकीकृत आकलन के साथ एक पारदर्शी व्यवस्था तैयार करना है।

डर्मल के अनुसार, इस एक्सचेंज में बाजार में होने वाली हेराफेरी को रोकने और हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए एक मजबूत जोखिम प्रबंधन प्रणाली भी होगी। इससे न केवल घरेलू खरीदारों को लाभ होगा, बल्कि भारतीय खनिजों को वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद बाजार भी मिलेगा।

खनिजों को राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को पाने के लिए आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था अनिवार्य है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 10,12,000 करोड़ रुपये के खनिजों का आयात किया, जो एक बड़ा आर्थिक बोझ है। इस आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू क्षमता का विस्तार और स्थानीय संसाधनों का कुशल उपयोग समय की मांग है।

पिछले एक दशक में भारतीय खनन क्षेत्र ने लंबी छलांग लगाई है। खनिज उत्पादन का मूल्य, जो साल 2013-14 में मात्र 50,000 करोड़ रुपये था, वह वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह विकास खान मंत्रालय द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों का नतीजा है। हालांकि, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उत्पादन बढ़ तो रहा है, लेकिन यह देश की बढ़ती आकांक्षाओं के लिए अभी पर्याप्त नहीं है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्षों में लौह अयस्क का उत्पादन 152 करोड़ टन से बढ़कर 312 करोड़ टन तक पहुंच गया है। इसी तरह, चूना पत्थर का उत्पादन 280 करोड़ टन से बढ़कर 483 करोड़ टन और बॉक्साइट का उत्पादन 22 करोड़ टन से बढ़कर 26 करोड़ टन हो गया है। स्पष्ट है कि उत्पादन की यह रफ्तार और नया खनिज एक्सचेंज मिलकर भारत को खनिज क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।


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