डेविस कप: सियोल में थमा भारत का सफर, दक्षिणेश्वर-बालाजी की बहादुरी पर भारी पड़ी सूनवू क्वोन की चुनौती
सियोल में खेले गए डेविस कप टेनिस टूर्नामेंट में दक्षिणेश्वर सुरेश और एन श्रीराम बालाजी की धमाकेदार जीत ने भारत की उम्मीदों की मशाल जलाए रखी थी, लेकिन सुमित नागल की हार के साथ ही भारत का सपना टूट गया। दक्षिण कोरिया ने 3-1 से यह मुकाबला अपने नाम कर नॉकआउट चरण में जगह पक्की कर ली। करो या मरो वाले उलट एकल मैच में भारत के नंबर एक खिलाड़ी सुमित नागल से बड़े उलटफेर की उम्मीद थी, लेकिन भीषण गर्मी और कोरियाई दिग्गज सूनवू क्वोन के दबदबे ने उन्हें बेबस कर दिया। नागल को 1-6, 2-6 से शिकस्त झेलनी पड़ी और इसी के साथ भारत की चुनौती समाप्त हो गई।
मुकाबले के पहले दिन शुक्रवार को दोनों एकल मैच हारकर 0-2 से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम गहरे दबाव में थी। कप्तान ने जोखिम लेते हुए निकी पूनाचा की जगह युवा दक्षिणेश्वर सुरेश को बालाजी के साथ युगल मैच में उतारा। यह मास्टरस्ट्रोक काम कर गया और भारतीय जोड़ी ने उई-सुंग पार्क और जी-सुंग नाम को तीन सेटों के कड़े संघर्ष में 6-3, 3-6, 6-3 से हराकर मुकाबले में जान फूंक दी। इस जीत के बाद निगाहें नागल पर थीं, लेकिन सूनवू क्वोन ने पहले गेम से ही उन पर शिकंजा कस दिया। नागल अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते दिखे और पहला सेट 1-6 से गंवा दिया। दूसरे सेट में कुछ जुझारूपन दिखाने के बावजूद वह क्वोन की सटीकता का मुकाबला नहीं कर सके। इस जीत के साथ कोरिया डेविस कप के नए प्रारूप में नॉकआउट के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली एशियाई टीम बन गई।
साल की शुरुआत में नीदरलैंड को धूल चटाने के बाद भारतीय टीम बुलंद हौसलों के साथ सियोल पहुंची थी। लक्ष्य अंतिम आठ में जगह बनाना था, लेकिन हार के कारण अब भारत को फिर से क्वालीफाइंग राउंड एक की चुनौतियों से गुजरना होगा। यह मुकाबला भारतीय कप्तान रोहित राजपाल के लिए भी भावुक हो सकता है, क्योंकि दिसंबर 2026 तक के उनके अनुबंध के विस्तार पर अभी तक कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। हालांकि, हार के बीच युगल मैच में भारत का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा। बालाजी और दक्षिणेश्वर ने शुरू से ही आक्रामक तेवर अपनाए और कोरियाई खिलाड़ियों को सिर उठाने का मौका नहीं दिया।
भारतीय जोड़ी ने जी-सुंग नाम की सर्विस पर लगातार प्रहार किए और शानदार विनर्स के जरिए दबाव बनाया। एक ही गेम में चार बार ब्रेक पॉइंट हासिल करना भारत के आक्रामक इरादों को दर्शाता था। बालाजी की वॉली और दक्षिणेश्वर के फोरहैंड विनर्स ने पहले सेट में भारत को 6-3 से बढ़त दिला दी। दूसरे सेट में पार्क और दक्षिणेश्वर ने अपनी सर्विस पर नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन बालाजी के एक खराब फोरहैंड ने कोरिया को वापसी का मौका दे दिया और मुकाबला निर्णायक सेट में पहुंच गया।
तीसरे सेट में रोमांच चरम पर था। दक्षिणेश्वर और पार्क दोनों ही अपनी सर्विस बचाने के लिए जूझ रहे थे। लेकिन भारत ने धैर्य नहीं खोया और आठवें गेम में बिना कोई अंक गंवाए कोरिया की सर्विस तोड़कर मैच पर कब्जा कर लिया। अंतिम क्षणों में जब स्कोर 30-30 था, तब दक्षिणेश्वर ने अपनी जादुई चमक बिखेरी और लगातार दो बेहतरीन विनर्स लगाकर भारत को एक यादगार युगल जीत दिलाई, जो दुर्भाग्य से टीम की जीत के लिए काफी नहीं रही।
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